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एमपी के बीजेपी विधायक संजय पाठक के केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, एसएलपी वापस लेने की दी अनुमति

Sanjay Pathak- विधायक पाठक अवमानना मामले में एससी ने याची को हाईकोर्ट भेजा जबलपुर

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Supreme Court Grants Permission to Withdraw SLP in MLA Sanjay Pathak Case

Supreme Court Grants Permission to Withdraw SLP in MLA Sanjay Pathak Case (फोटो सोर्स- social media)

Sanjay Pathak- एमपी के विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक से जुड़े लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। देश की शीर्ष कोर्ट ने याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। खास बात यह है कि सीजेआई सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने दीक्षित को विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) वापस लेने की अनुमति दे दी। याचिकाकर्ता ने जांच सहित अन्य मांगों पर विचार न होने के कारण सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। सोमवार को सुनवाई के बाद शीर्ष कोर्ट ने दीक्षित को हाईकोर्ट के समक्ष जाने की छूट देकर एसएलपी वापस लेने की मंजूरी दे दी।

आपराधिक अवमानना मामले में जबलपुर हाईकोर्ट के समक्ष विधायक संजय पाठक हलफनामा पेश कर अपनी गलती स्वीकार कर बिना शर्त माफी मांग चुके हैं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि आपराधिक अवमानना में तभी दंड का प्रावधान है, जब गलती अक्षम्य हो या संबंधित व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार नहीं करे। रोहतगी ने कहा कि विधायक संजय पाठक ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। इस पर हाईकोर्ट ने उनका हलफनामा रिकॉर्ड पर लेते हुए विधायक संजय पाठक को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रेल को तय की गई थी।

कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की ओर से याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि विधायक संजय पाठक से संबंधित कंपनी के विरुद्ध अवैध उत्खनन के मामले में जस्टिस विशाल मिश्रा ने एक सितंबर 2025 को सुनवाई से इनकार कर दिया था।

पाठक से जुड़ी फर्मों पर 443 करोड़ का जुर्माना, मामले की सुनवाई कर रहे जज को कर दिया फोन

बता दें कि विधायक संजय पाठक से जुड़ीं पारिवारिक फर्मों पर अनुमति से अधिक खनन के आरोप हैं। इन फर्मों पर 443 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। इसी मामले की सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट जज को उन्होंने सीधा फोन कर दिया जिसके बाद संबंधित जज सुनवाई से हट गए। इसी मामले में हाईकोर्ट ने विधायक संजय पाठक पर आपराधिक अवमानना केस चलाने के आदेश दिए हैं।

मांगों पर विचार न होने पर आशुतोष दीक्षित ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई

आशुतोष दीक्षित ने मप्र हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि विधायक संजय पाठक ने हाईकोर्ट जज से फोन पर संपर्क किया। इस कारण जस्टिस विशाल मिश्रा ने एक सितंबर, 2025 को सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को भाजपा विधायक के विरुद्ध आपराधिक अवमानना का प्रकरण दर्ज करने का निर्देश दिया था। मामले की जांच सहित अन्य मांगों पर विचार न होने पर आशुतोष दीक्षित ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। इसपर सुनवाई के बाद शीर्ष कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता विधायक संजय पाठक के खिलाफ दर्ज आपराधिक अवमानना के प्रकरण में हाईकोर्ट की मदद कर सकता है।