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जबलपुर से स्लीपर कोच में नहीं मिलेगी ‘बेडरोल’ सुविधा, Indian Railway की योजना से डरी एजेंसियां!

Sleeper coach bedroll service: भारतीय रेलवे की महत्वकांक्षी योजना पर एमपी के जबलपुर में लगा ब्रेक, लाखों यात्रियों को तगड़ा झटका, वजह भी बड़ी जरूर पढ़ें पूरी खबर
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जबलपुर

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Sanjana Kumar

•

Updated: 8 Jun 2026, 2:59 PM IST

Sleeper Coach Bedroll Service

Sleeper Coach Bedroll Service (photo: Indian Railway X)

Sleeper Coach Bedroll Service: भारतीय रेलवे की ओर से स्लीपर कोच के यात्रियों को AC कोच जैसी सुविधाएं देने की महत्वाकांक्षी योजना (Sleeper Coach Bedroll Service) फिलहाल ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है। भारतीय रेलवे ने स्लीपर श्रेणी के यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए स्लीपर में बेडरोल की सुविधा की मांग पर बड़ा फैसला लेते हुए यह योजना शुरू करने की घोषणा की थी। पश्चिम मध्य रेलवे में अधर में अटकी इस योजना की बड़ी वजह माना जा रहा है एमपी के जबलपुर से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को। क्योंकि इस सेवा को संचालित करने के लिए इन ट्रेनों में कोई भी प्राइवेट एजेंसी आगे नहीं आ रही है।

यहां जानें क्या थी रेलवे की योजना?

रेलवे की योजना के मुताबिक, स्लीपर क्लास में यात्रा करने वाले यात्री टिकट बुकिंग के समय या सफर के दौरान अतिरिक्त शुल्क देकर साफ-सुथरा बेडरोल (Sleeper Coach Bedroll Service) ले सकते थे। योजना के तहत यह साफ था कि यह सेवा पूरी तरह स्वैच्छिक होगी और इसका शुल्क मूल यात्रा टिकट से अलग होगा।

जबलपुर से दिल्ली, मुंबई, पुणे और पटना की ट्रेनों में शुरू होनी थी सुविधा

प्रारंभिक चरण में पश्चिम मध्य रेलवे ने जबलपुर से दिल्ली, मुंबई, पुणे और पटना तक की लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेनों के लिए यह प्रस्ताव (Sleeper Coach Bedroll Service) तैयार किया था। वहीं इसके लिए इच्छुक एजेंसियों से आवेदन भी आमंत्रित किए गए थे। लेकिन भारतीय रेलों में स्लीपर कोच की जमीनी हकीकत को जानते हुए कोई भी एजेंसी रेलवे की इस योजना को संचालित करने की हिम्मत नहीं कर पा रही।

जानें क्यों पीछे हट रही एजेंसियां

जानकार बताते हैं कि भारतीय रेलों (Indian Railway) में स्लीपर कोच की हालत को देखते हुए एजेंसियां इस प्रोजेक्ट को हाथ में लेने से ही डर रही हैं। AC कोच के विपरीत स्लीपर कोच की खिड़कियां खुली रहती हैं, इससे बेड रोल के चादर, कंबल और तौलिया ज्यादा गंदे और डैमेज होंगे। इसके अलावा इन कोच में बेड रोल का मैंटेनेंस करने मैन पावर पर खर्च भी इन एजेंसियों को डरा रहा है। एजेंसियों को आशंका है कि यह कम मुनाफे और ज्यादा जोखिम का खेल है, जो भविष्य में घाटे के सौदा साबित हो सकता है।

दक्षिण रेलवे में सफल हुआ प्रोजेक्ट

एक तरफ जहां पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) में अब तक प्रोजेक्ट के लिए जहां एजेंसियां आगे नहीं आ रहीं, और जबलपुर रेल मंडल में योजना लगभग अटक ही गई, इसके विपरीत दक्षिण रेलवे के कुछ रूट्स पर और चुनिंदा ट्रेनों में यह सुविधा सफल हो गई है। वहां से मिलने वाले फीडबैक को लेकर भारतीय रेलवे ने राहत की सांस ली है। इसीलिए इस योजना को देशभर की ट्रेनों में लागू करने की तैयारी भी थी।

अब यात्रियों को करना होगा इंतजार, दोबारा जारी हो सकता है टेंडर

पश्चिम मध्य रेलवे में इस योजना (Sleeper Coach Bedroll Service) के अटकने से उन लाखों यात्रियों को झटका लगा है, जो अक्सर स्लीपर कोच से सफर करते हैं। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को राहत देने वाली यह सुविधा अधरझूल में है। मामले में रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वे अब इस टेंडर की शर्तों की समीक्षा में लगे हैं। जल्द ही कुछ रियायतों के साथ दोबारा टेंडर आमंत्रित किए जा सकते हैं, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाया जा सके।