
जबलपुर. मार्च से सितंबर आ गया पर अब तक कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट तत्काल या कम से कम उसी दिन मिलने की व्यवस्था नहीं बन पाई जो मरीजों और उनके संपर्कियों के लिए घातक साबित हो रही है। तकरीबन हर जगह एक सी स्थिति है, सैपल जिस दिन लिए जा रहे है रिपोर्ट आने में कई दिन लग रहे हैं। ऐसे में रिपोर्ट आने तक संदिग्ध मरीज भी आइसोलेशन में नहीं जा रहे, वो निरंतर लोगों से मिल रहे हैं। यह स्थिति सबसे खतरनाक है जिस पर तनिक भी नियंत्रण नहीं हो रहा है।
शासन प्रशासन की ओर से तमाम उपाय किए जा रहे हैं कि सैंपल लेने के कुछ घंटे बाद रिपोर्ट आ जाए पर ऐसा बहुधा हो नहीं पा रहा है जिससे वायरस को फैलने का पूरा मौका मिल रहा और वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर रहा है। हाल के दिनों में कोरोना वायरस के संक्रमण में आई तेजी को विशेषज्ञ इसी नजर से ले रहे हैं।
पिछले दिनों कलेक्ट्रेट में एक एडीएम के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद उनके नजदीकी संपर्की स्टॉफ ने 10 सितंबर को सैंपलिंग कराई। स्नेह नगर स्थित फीवर क्लीनिक में एक कर्मचारी ने सैंपल दिया तथा जब वे पांचवें दिन रिपोर्ट पता करने पहुंचे तो कहा गया कि कोई फोन नहीं आया तो निगेटिव ही समझो। शुक्रवार को जब उनका बेटा एक बार फिर रिपोर्ट की जानकारी लेने पहुंचा तो उन्हें पॉजिटिव बताकर वहां मौजूद डेंटिस्ट ने एक प्रिस्क्रिप्शन थमा दिया जिसमें 14 दिन होम क्वारंटीन रहने की सलाह के साथ ही चंद दवाएं लिखीं थीं। इस तरह की लापरवाही से ही कोरोना संक्रमण तेज हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही से कोरोना संक्रमण रोकने की कोशिशें सफल होनी मुश्किल ही है।
विशेषज्ञ आम जन को भी बराबर का दोषी मान रहे हैं। उनका कहना है कि आम रोगों की तरह लोग अब भी कोरोना को हल्के में ले रहे हैं। आलम यह कि 6 महीने बाद भी लोग समझ नहीं रहे कि कोरोना वायरस का संक्रमण कितना तीखा है। लोग अब भी लक्षण पता चलने के बाद भी पहले घरेलू इलाज को तरजीह दे रहे हैं। तकलीफ बढ़ने पर अपने परिचित डॉक्टरों की सलाह पर एक-दो दिन बर्बाद कर देते हैं, जब हालत ज्यादा बिगड़ जाती है तभी वो अस्पताल आते हैं। ऐसे में इस तरह के कोरोना संक्रमितों को संभाल पाना मुश्किल हो जाता है। कई केस ऐसे भी मिले हैं जिनमें डॉक्टर के पास भी करने के लिए कुछ खास नहीं रहा। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है कि सतर्कता के साथ समय पर अस्पताल पहुंचा जाए।