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MPPSC मेंस पर स्टे पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अभ्यर्थियों की दी राहत

MPPSC Mains-2025 - एमपीपीएससी मेंस-2025 का रास्ता साफ, मूल मुद्दों पर सुनवाई 17 को, हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक हटाई

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मुख्य परीक्षा के आयोजन पर रोक लगा दी थी

MPPSC-Photo Patrika.com

MPPSC - मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपी-पीएससी) MPPSC परीक्षा पर अभ्यर्थियों को खासी राहत दी है। कोर्ट ने एमपीपीएससी मेंस पर स्टे पर बड़ा फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा यानि मेंस-2025 MPPSC Mains-2025 के आयोजन का रास्ता साफ कर दिया है। इस पर लगी अंतरिम रोक हटा दी है। हाईकोर्ट ने मूल मुद्दों पर अलग से सुनवाई करने की बात कही है। राज्य सेवा परीक्षा के परिणाम और आरक्षण नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह फैसला दिया। अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्य परीक्षा पर लगी रोक हटाने का आग्रह किया गया था जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

जबलपुर हाईकोर्ट ने गुरुवार को एमपीपीएससी की मुख्य परीक्षा पर 25 मार्च से लागू अंतरिम स्थगन आदेश समाप्त कर दिया। हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया।

परिणाम और आरक्षण नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर

एमपी हाईकोर्ट में एमपीपीएससी की राज्य सेवा परीक्षा के परिणाम और आरक्षण नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर की गई हैं। इनपर सुनवाई के दौरान गुरुवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। याचिकाकर्ताओं की ओर से सुनवाई के दौरान कोर्ट से आग्रह किया गया कि मुख्य परीक्षा पर लगी रोक हटाई जाए, ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।

कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह व पुष्पेद्र कुमार शाह ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा। इधर मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से अधिवक्ता पराग तिवारी खड़े हुए।

मुख्य परीक्षा के आयोजन पर रोक लगा दी थी

याचिकाओं में वर्गवार कट-आफ अंक सार्वजनिक नहीं करने, आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को अनारक्षित पदों पर चयनित नहीं करने, आयु सीमा जैसी छूट लेने वाले अभ्यर्थियों के अनारक्षित वर्ग में माइग्रेशन संबंधी नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। इन्हीं याचिकाओं पर कोर्ट ने 25 मार्च और दो अप्रेल 2025 को मुख्य परीक्षा के आयोजन पर रोक लगा दी थी।

शेष मुद्दों पर अलग से सुनवाई का आग्रह आया काम

गुरुवार को मामला डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन देर शाम तक सुनवाई नहीं हो सकी। इस पर याचिकाकर्ता के वकीलों ने निवेदन किया कि अंतरिम आदेश समाप्त किया जाए। शेष मुद्दों पर अलग से सुनवाई की जाए। कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार कर आयोग को मुख्य परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी। हालांकि मूल कानूनी प्रश्न अभी भी विचाराधीन हैं।