जिला अदालत का फैसला : कोर्ट ने पांच हजार रुपए जुर्माना भी लगाया
जबलपुर. चॉकलेट देने के बहाने पांच साल की मासूम को जंगल में लेकर ज्यादती का प्रयास करने एक आरोपी जिला अदालत ने सात साल के सश्रम करावास की सजा सुनाई है। पॉक्सो एक्ट मामलों के विशेष न्यायाधीश पीसी गुप्ता ने आरोपी पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
यह है मामला
अभियोजन के अनुसार खमरिया थानांतर्गत निवासी बच्ची अपने दादा-दादी के घर गई थी। ५ अक्टूबर २०१६ क ी सुबह जब वह दादा-दादी के यहां आंगन में खेल रही थी, तभी स्थानीय निवासी युवक शम्भू प्रसाद बर्मन वहां आया। बच्ची को अकेला देखकर उसने उसे चॉकलेट खिलाने का लालच दिया। फुसलाकर वह बच्ची को समीप ही जंगल में ले गया, जहां उसने उससे ज्यादती का प्रयास किया। डर के मारे बच्ची ने दादा-दादी से इस संबंध में कोई चर्चा नहीं की।
पिता से कहा-नहीं जाऊंगी दादा-दादी के यहां
३१ अक्टूबर को दोबारा जब बच्ची के पिता ने उसे दादा-दादी के घर ले जाने के लिए कहा तो वह रोने लगी। और पिता से कहने लगी कि अब वह दादा-दादी के यहां कभी नहीं जाएगी। पिता के पूछने पर बच्ची ने सारी घटना बयान कर दी। पिता ने मामले की शिकायत खमरिया पुलिस थाने में की। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अंतिम सुुनवाई के बाद पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश ने आरोपित को भादंवि की धारा ३७६ व पॉक्सो एक्ट की धारा ४ के तहत आरोपी करार दिया। कोर्ट ने उसे सात साल सश्रम कारावास व ५ हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। अभियोजन अधिकारी अनुपम पाठक ने शासन का पक्ष रखा।
_________________________________________________________
मोटर साइकिल से मारी टक्कर, अदालत उठने तक की सजा
जबलपुर. जिला अदालत ने लापरवाही से मोटर साइकिल चलाने पर एक युवक को अदालत उठने तक की सजा से दंडित किया। जेएमएफसी प्रितांजलि सिंह की कोर्ट ने आरोपी को भादंवि की धारा २७९, ३३५ के तहत एक हजार रुपए जुर्माने से भी दंडित किया। कोर्ट ने जुर्माने की यह राशि पीडि़त को प्रतिकर के रूप में प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
तीन माह में आया फैसला
अभियोजन के अनुसार २२ अक्टूबर 2017 को फरियादी शेख वाहिद अपने मामा व भाई के साथ ऊंट लेकर गायत्री मंदिर से अपने घर आ रहा था। अहिंसा चौक पर देवेंद्र वर्मा ने लापरवाही से मोटर साइकिल चलाते हुए उसे टक्कर मार दी। इससे उसे कमर व पैर में चोटें आईं। शिक ायत पर पुलिस ने आरोरी के खिलाफ प्रकरण अदालत में पेश किया था। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी को अपराधी ठहराते हुए अदालत उठने तक की सजा सुनाई।