
जबलपुर।
उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों मे पिछले चार सालों से जारी ई-अटेण्डेंस को समाप्त कर दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों को आदेश जारी कर दिए हैं। प्राचार्यों से कहा गया है कि शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति को सुनिश्चित किया जाए। उच्च शिक्षा विभाग के इस निर्णय से प्राध्यापकों में खुशी व्याप्त हो गई है क्योंकि उन्होंने इसे अपमान बताया था।
75 फीसदी उपस्थिति आवश्यक
विभाग ने स्पष्ट किया है कि भले ही ई अटेंण्डेस को समाप्त कर दिया गया हो लेकिन छात्रों की न्यूनतम उपस्थिति 75 फीसदी होनी आवश्यक है। वहीं दूसरी और शिक्षकों के नियमित रूप से उपस्थित होने की जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज प्राचार्य की होगी। अनुपस्थित रहने वाले को समय समय पर चेतावनी दी जाए। विभाग ने कहा है कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु राज्य शासन द्वारा रुसा एवं विश्व बैंक परियोजना की सहायता से कई गुणवत्ता सुधार कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों के साथ ही गुणवत्ता सुधारने में शिक्षकों एवं छात्रों की भूमिका सर्वोपरि है। इसके लिए जरूरी है कि सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
वचन पत्र के अनुसार लिया निर्णय
यह निर्णय प्रदेश सरकार ने चुनाव पूर्व वचन पत्र में की गई घोषणा के परिपालन में लिया गया है। प्राध्यापकों ने कहा था कि वे शिक्षण कार्य के साथ-साथ कई तरह के कार्य करते हैं। एेसे में ई-अटेण्डेंस जैसी व्यवस्था उन्हें अपमानित करती है। वचन पत्र में इसे समाप्त करने का वादा किया था।
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सरकार का यह निर्णय स्वागत योग्य है। शिक्षक पढ़ाई के अलावा अनुसंधान, व्याख्यान, सेमिनार, नेक निरीक्षण जैसी तैयारियों में व्यस्त रहते हैं। ई-अटेंडेंस को लेकर विरोध दर्ज किया गया था। सरकार ने वचन पत्र के वादे को निभाया।
-डॉ.अरुण शुक्ल जिलाध्यक्ष, प्रांतीय शासकीय प्राध्यापक संघ