अधारताल स्थित देना बैंक का घोटाला-एफडी खातों में जमा लाखों की धनराशि बैंक अधिकारियों ने हड़पे
जबलपुर। अधारताल स्थित देना बैंक में ग्राहकों की जमा धनराशि का बड़ा घपला सामने आया है। बैंक से जुड़े लोगों ने ही अपनी गोपनीय आईडी का प्रयोग कर ग्राहकों की एफडी राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर पैसों का बंदरबांट कर लिया। ये रकम लाखों की है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने इस मामले में बैंक से जुड़े अधिकारियों सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
देना बैंक अधारताल में छह जुलाई 2018 से पहले तत्कालीन अधिकारी मीनाक्षी काछी, प्रदीप साहू, तत्कालीन सीनियर मैनेजर आरएन दास, विमला तिर्की, अनामिका आस्तिक, शानेंद्र कुड़ापे, धनीराम अहिरवार, शेख जाहिद और अन्य के खिलाफ धारा-409, 420, 467, 468, 471, 120 बी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 सी, 13 (1 ) ( ए) का प्रकरण दर्ज किया गया।
ये है पूरा फर्जीवाड़ा-
बैंक अधिकारी मीनाक्षी काछी ने अपनी गोपनीय आईडी, अन्य अधिकारी रविंद्र नाथ दास, लिपिक शानेंद्र कुडापे ने गोपनीय आईडी का प्रयोग कर खाताधारक निधि तिवारी के एफडी खाते से 17.23 लाख रुपए बिना उनकी जानकारी के बंद कर दिया। फिर 22 जनवरी 2013 से जनवरी 2014 के बीच में आरोपियों ने इस रकम को खाता धारक शंकरलाल साहू, धनीराम अहिरवार, कलाबाई, दशोदा बाई, लल्लू लाल पटेल के खाते में ट्रांसफर कर निकाल लिया गया। मीनाक्षी ने दशोदा बाई के खाते से भी दो बार में 1.50 लाख रुपए धनीराम अहिरवार के खाते में ट्रांसफर कर निकाल लिया था। जबकि आरएन दास ने गोपनीय आईडी का प्रयोग कर 4.51 लाख, अनामिका आस्तिक ने 1.52 लाख, मीनाक्षी काछी ने 3.00 लाख, विमला तिर्की ने 1.49 लाख रुपए कलाबाई नाम की खाताधारक के खाते से धनीराम अहिरवार के खाते में ट्रांसफर किया। इसी तरह उक्त आरोपियों ने एक के खाते से दूसरे के खाते में पैसे का ट्रांसफर कर निकासी करते रहे। लगभग 30 लाख रुपए से अधिक का फर्जीवाड़ा अब तक पकड़ में सामने आया है।
वर्जन-
देना बैंक की अधारताल शाखा से जुड़े खाता धारकों के एफडी और बचत खातों से बैंक कर्मियों ने गोपनीय आईडी व पासवर्ड का प्रयोग कर लाखों का ट्रांसफर किया गया। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर लिया गया है।
नीरज सोनी, एसपी ईओडब्ल्यू