मप्र हाईकोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने से किया इनकार, चिटफंड कंपनी के जरिए पति-पत्नी पर है लोगों को ठगने का आरोप
जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने राजस्थान की जयपुर निवासी महिला की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमेंं उसके खिलाफ दर्ज क ी गई धोखाधड़ी की एफआईआर निरस्त करने की मांग की गई थी। जस्टिस सुशील कुमार पालो की बेंच ने अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामला गंभीर है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती। उल्लेखनीय है कि महिला और उसके पति पर छिंदवाड़ा जिले के सौसर थाने में सोना डबल करने व इनाम का लालच देकर जनता से करोड़ों रुपए की ठगी का अपराध दर्ज किया गया है। लुटने वालों में कुछ बड़े परिवारों के लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो अब पछता रहे हैं।
याचिका में यह दी दलील
६२, डीसीएम, शांतिनगर, अजमेर रोड जयपुर निवासी ज्योति शर्मा ने यह याचिका दायर की है, इसमें कहा गया है कि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने साजिश कर राजस्थान व मप्र में उनके खिलाफ मामले दर्ज कराए हैं, जबकि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उनकी मदद के नाम पर उसका यौन शोषण किया। जिसकी रिपोर्ट भी उसने भोपाल के महिला थाने में ११ जुलाई २०१४ को दर्ज कराई थी। इसी अधिकारी के प्रभाव में बाद में उसके खिलाफ राजस्थान व मप्र में ठगी के मामले दर्ज किए गए। लिहाजा ये एफआईआर निरस्त की जाएं।
यह है मामला
अभियोजन के अनुसार सौसर जिला छिंदवाड़ा निवासी अशोक वविस्तले, जयप्रकाश राव, राजू वविस्तले, किशोर सूर्यवंशी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि जयपुर निवासी शिवराज शर्मा व उसकी पत्नी ज्योति शर्मा ने इव मिरेकल ज्वेलर्स लिमिटेड जयपुर नाम से चिटफंड कंपनी का दफ्तर सौंसर में खोला। संगठित तरीके से पति-पत्नी ने सेमीनार व विज्ञापनों के जरिए १८ माह में सोना डबल करने की योजना का प्रचार-प्रसार कर निवेशकों को लालच दिया। सोने की बुकिंग पर भी एक से १० लाख रुपए तक के डिस्काउंट का दावा दोनों किया करते थे।
अपने सहयोगियों मुकेश बैरवा, हरीश शर्मा व भारत चौधरी की मदद से दोनों ने क्षेत्रीयजनों से करीब १७० करोड़ रुपए के जेवरात व नकदी जमा करा ली। इसके बाद दोनों बोरिया-बिस्तर बांध कर चम्पत हो गए। जांच के बाद सौंसर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भादंवि की धारा ४२०, ३४ का प्रकरण दर्ज कर लिया। इसी मामले को खारिज करने के लिए यह याचिका दायर की गई थी। सरकार का पक्ष शासकीय अधिवक्ता सीके मिश्रा ने रखा।#gold #goldprice #goldrate