जबलपुर

व्यापमं के पूर्व डायरेक्टर योगेश उपरीत को वापस नहीं मिलेगा जब्त पासपोर्ट

हाईकोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका की निरस्त
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High court latest decision on vyapamam scam
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जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने व्यापमं (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) के पूर्व डायरेक्टर व कम्प्यूटर घोटाले के मुख्य आरोपी योगेश उपरीत का जब्त किया गया पासपोर्ट वापस लौटाने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने उपरीत की पुनरीक्षण याचिका निरस्त कर दी। ईओडब्ल्यू ने घोटाले में लिप्त कंपनी की ओर से उपरीत को सिंगापुर टूर कराने के मामले पर यह पासपोर्ट जब्त किया था।

निजी कंपनी को पहुंचाया था लाभ
ईओडब्ल्यू के अनुसार कम्प्यूटर खरीदी में गड़बड़ी मामले में 7 जुलाई 2004 को एफआईआर दर्ज हुई थी। जांच में पाया गया कि पांच पॉलीटेक्निक कॉलेज व चार आईटीआई को 60 लाख रुपए के 78 कम्प्यूटर अवैध रूप से खरीद कर सप्लाई कर दिए गए। व्यापमं के पुराने 42 कम्प्यूटर अवैध तरीके से बेचे गए। हाई स्पीड स्केनर तथा लेजर प्रिंटर खरीदी में दस्तावेजों में फेरबदल कर व अन्य कई सामग्री खरीदकर श्रेया डॉट कॉम को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

पासपोर्ट बने सिंगापुर टूर के सबूत
ईओडब्ल्यू के अनुसार इस एहसान के बदले व्यापमं के तत्कालीन चेयरमैन अरुण गुप्ता व संचालक योगेश उपरीत ने कम्प्यूटर सप्लायर के खर्चे पर सिंगापुर की यात्रा की थी। इस पर भादंवि की धारा 420, दस्तावेजों की कूटरचना और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 28 जून 2014 को गुप्ता व उपरीत के खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया। इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ 29 नवंबर 2008 को चालान पेश हो चुका है। अधिवक्ता अर्पण जे पवार ने कहा कि उपरीत के पासपोर्ट की समयसीमा 2014 में समाप्त हो चुकी है। अवधि बढ़ाने के लिए उन्होंने भोपाल जिला अदालत में अर्जी दी, लेकिन 9 जुलाई 2018 को यह खारिज कर दी गई। इसके खिलाफ यह पुनरीक्षण याचिका दायर की गई। ईओडब्ल्यू के अधिवक्ता सत्यम अग्रवाल ने कहा कि पासपोर्ट आरोपितों क ी विदेश यात्रा का साक्ष्य हैं। अंतिम सुनवाई के बाद याचिका निरस्त कर दी गई।

इधर विवेकानंद कॉलेज को नोटिस
मप्र हाईकोर्ट ने राज्य शासन, क्षेत्रीय अतिरिक्तसंचालक उच्च शिक्षा व विवेकानंद कॉलेज लखनादौन से पूछा है कि एक लाख रुपए दान में लिए बिना महेश वर्मा बंटी को कैसे जनभागीदारी समिति का अध्यक्ष बना दिया। जस्टिस सुजय
पॉल की सिंगल बेंच ने अनावेदकों को नोटिस जारी किए हैं। सभी से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया। लखनादौन निवासी अमित तिवारी ने याचिका दायर कर कहा कि सरकार ने 20 फरवरी 2015 को एक नियम लागू किया। इसके अनुसार जो गणमान्य नागरिक कॉलेज को एक लाख रुपए का दान करेगा, उसे कॉलेज की जनभागीदारी समिति का अध्यक्ष बनाया जाएगा। अधिवक्ता शीतला प्रसाद त्रिपाठी व सुशील त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि इसके बावजूद 10 अक्टूबर 2017को महेश वर्मा बंटी नामक व्यक्ति को बिना एक लाख रुपए दान लिए जनभागीदारी समिति का अध्यक्ष बना दिया गया है।

Published on:
30 Sept 2018 03:08 pm