जबलपुर

हाईकोर्ट ने सिमी सदस्यों को नहीं दी जमानत, कहा- छूटे तो भाग जाएंगे

दोनों से पाइप बम और बड़ी तादाद में घातक विस्फोटक का जखीरा मिला था और दोनों सिमी के हार्डकोर सदस्य हैं। ससुर
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May 31, 2018
High Court not bail to SIMI members
High Court not bail to SIMI members

जबलपुर । मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन सिमी (स्टूडेंट्स इसलामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के दो सदस्यों अब्दुल वाहिद और साजिद हुसैन को जमानत देने से एक बार फिर इनकार कर दिया। जस्टिस सीवी सिरपुरकर की बेंच ने कहा, दोनों से पाइप बम और बड़ी तादाद में घातक विस्फोटक का जखीरा मिला था और दोनों सिमी के हार्डकोर सदस्य हैं। ऐसे में जेल से छोड़ा गया, तो दोनों भाग सकते हैं। हाईकोर्ट पहले भी इसी आशंका में आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर चुकी है।


यह है मामला
एटीएस और एसटीएफ भोपाल की संयुक्त टीम ने 30 जनवरी-2014 को वजीर बेग कॉलोनी इंदौर रोड, उज्जैन निवासी अब्दुल वाहिद खान को उसके ठिकाने से गिरफ्तार किया था। उसकी ही निशानदेही पर उसके सहयोगी साजिद उर्फ गुड्डू हुसैन को सैफी कॉलोनी महिदपुर जिला उज्जैन से पकड़ा गया। दोनों से पूछताछ और जांच के दौरान सिमी के प्रदेशभर में स्थित ठिकानों पर छापे मारे गए। आरोपियों के कब्जे से सिमी से संबंधित धार्मिक उन्माद भड़काने वाला साहित्य, सीडी बरामद किए गए थे। उनमें पाइप बम, बड़ी मात्रा में उच्च विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट और बैटरी चलित डेटोनेटर डिवाइस सहित असलहे भी थे।
35 में से 31 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज किए जा चुके हैं। लगभग सभी के बयानों से साफ है कि आरोपी आतंकी और देशद्रोही गतिविधियों में संलग्न थे। आरोपियों के साथी इरफान उर्फ मोबाइल तथा अब्दुल रशीद ने आरोपियों के सिमी के सक्रिय सदस्य होने और उनके द्वारा लगातार आतंकी गतिविधियों में संलग्न रहने की पुष्टि की है।


सिमी सरगना को देते थे पनाह
प्रकरण के मुताबिक आरोपी साजिद हुसैन 2007 से सिमी का सक्रिय सदस्य रहा है। वह मोबाइल फोन से लगातार सिमी के अन्य हार्डकोर सदस्यों के संपर्क में रहता था। अहमदाबाद जेल की रैकी सिमी के जुबेर के साथ उसी ने की थी। इसके अलावा सिमी सरगना अबू फैज़ल सहित अन्य आतंकियों को वह समय-समय पर अपने यहां पनाह देता रहा। वह अपने घर में सिमी नेताओं की बैठकें कराता था। अब्दुल वाहिद इन सबमें साजिद का सहयोगी रहा।

Published on:
31 May 2018 11:36 am