
लाली कोष्टा@जबलपुर। स्कूल में टीचर्स जब कॉम्पीटिशन के लिए हैंडमेड गिफ्ट, प्रोजेक्ट बनाती थी। मेरा काम सबसे सराहनीय होता था तो टीचर्स ने मेरा हौंसला बढ़ाया और मैंने इसी फील्ड को फ्यूचर बनाने का प्रण कर लिया। आज कमर्शियल के साथ शौक पूरा कर रहे हैं। इसमें आज जो भी पहचान बनी है और काम मिल रहा है वो सोशल मीडिया की देन है। सोशल मीडिया ने हमें बहुत बड़ा खुला बाजार ही नहीं दिलाया, बल्कि कला के सच्चे कद्रदानों से भी मिलवाया। जो निरंतर हमें गतिमान बनाए रखने में सहयोग कर रहे हैं। ये कहना है फाइन आर्ट स्टूडेंट रेशम ठाकुर 23 वर्ष का। जबलपुर निवासी रेशम ने इसी साल मास्टर्स डिग्री पूरी की है।
भाई बहन का मिला साथ
रेशम ने बताया कि मैं हमेशा से ही खुद के बनाए गिफ्ट्स ही किसी को शादी, बर्थडे या अन्य अवसरों पर देती थी। जिसे लोग पसंद भी करते हैं। कुछ लोगों ने मेरे गिफ्ट देखकर मुझे अपने लिए बनाने के ऑर्डर देने शुरू किए तो सोचा क्यों न इसे प्रोफेशनली किया जाए। इस पर भाई बहन ने मेरा पूरा सपोर्ट किया। अब बात आई कि प्रमोशन कैसे होगा, पहले से स्थापित कलाकारों के सामने हम अपने आप को कैसे प्रूफ कर पाएंगे तो सोशल मीडिया पर आने का विचार बनाया।
सोशल मीडिया ने सोच से ज्यादा दिया
इंस्टाग्राम, फेसबुक और वॉट्सएप पर अपने काम का प्रमोशन शुरू किया तो जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा अच्छा रिस्पॉंस मिला। लोगों ने काम देखा, जानकारी ली और ऑर्डर देने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया पर हमारा पेज खूब देखा जाता है। जिसके बदले हमें काम भी खूब मिल रहा है।
मां ने सिखाई सिलाई कढ़ाई
आम तौर पर आर्टिस्ट केवल पेंटिंग या स्कल्पचर ही बनाते हैं, वहीं रेशम ठाकुर इन सबके साथ सिलाई कढ़ाई का वर्क भी शामिल कर नए नए आर्ट बनाने का काम करती हैं। रेशम ने बताया कि उनकी मम्मी ने उन्हें पेंटिंग और गिफ्ट आइटम में सिलाई और कढ़ाई के काम को शामिल करने की सलाह दी, पहले तो अजीब लगी, किंतु बाद में इसके रिजल्ट अच्छे मिले। मम्मी ने मुझे सिलाई कढ़ाई सिखाई है। इंस्टाग्राम फेसबुक पर हम तीनों भाई बहन आर्टवर्क पोस्ट करते हैं और आज हम तीनों उस पेज के द्वारा एम्ब्रायडरी पोट्र्रेट्स ,ओर कस्टम रेप्लिका डॉल्स व मिनिएचर्स सेल करते है ।
लॉकडाउन में मोबाइल का सदुपयोग किया
लॉकडाउन के समय जहां लोगों ने मोबाइल पर गेम खेले, मूवी आदि देखी, वहीं हमने आपदा को अवसर में बदला। अपना पेज बनाया। क्योंकि लोग अपना समय लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया पर अधिक देने लगे थे ,वहीं से मुझे लगा कि अगर हम अपना टाइम सोशल मीडिया पर अपने आर्टवर्क का प्रमोशन करने के लिए दे तो, काफी बेहतर रिस्पांस मिल सकता है। हमने बैठकर विचार किया कि सोशल मीडिया से बेहतर माध्यम कहीं नही मिल सकता हमें अपनी कला के प्रमोशन के लिए। सोशल मीडिया के वजह से ही आज हमारा यह प्रयास कम समय में बहुत से लोगों तक पहुंच बना सका है।