बिल्डर ने कॉलोनी विकसित करने संबंधी आवश्यक शर्तों का पालन किया है या नहीं इस ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हद तो ये कि पंजीयन विभाग के कर्मचारी बेबाकी से ये कहते हैं कि उनका काम सिर्फ रजिस्ट्री करना है।
illegal colony: शहर में जमीन के खेल में मनमानी सौदेबाजी चल रही है। अवैध कॉलोनी बसाने वाले तथाकथित बिल्डर भूमि विकास नियम, नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को धता बताते हुए खेती की जमीनों में चूने की लाइन डालकर प्लाट बेच रहे हैं। पंजीयन कार्यालय को पंजीयन शुल्क वसूलने के अलावा इससे कोई सरोकार नहीं है कि जमीन किस मद की है। साथ ही बिल्डर ने कॉलोनी विकसित करने संबंधी आवश्यक शर्तों का पालन किया है या नहीं इस ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हद तो ये कि पंजीयन विभाग के कर्मचारी बेबाकी से ये कहते हैं कि उनका काम सिर्फ रजिस्ट्री करना है।
जानकारी के अनुसार किसी जमीन की रजिस्ट्री से पहले उसका मौका मुआयना और पड़ताल होना चाहिए। हद तो ये कि वे भूखंड जिन पर कॉलोनियों का निर्माण होना है उनकी जमीनों की भौतिक स्थिति देखने के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। महज जमीन की चौहद्दी की अलग-अलग एंगल की फोटो लगाकर रजिस्ट्री के दस्तावेज तैयार कर लिए जा रहे हैं।
रांझी के मानेगांव क्षेत्र के निगम सीमा में शामिल होने के बाद से क्षेत्र में जमीनों की जमकर बंदरबांट हुई है। इस इलाके में श्मशान, चरनोई, पहाड़ी मद की जमीनों पर भी कॉलोनियां तान दी गईं। हद तो ये कि इन जमीनों पर भी प्लाटों की रजिस्ट्री हो गई और लोगों के मकान बन गए।
सवा दो सौ अवैध कॉलोनियों में हजारों की संख्या में रजिस्ट्री हो चुकी है। प्रापर्टी डीलरों ने जमीनों का सौदा करा दिया। बिल्डरों ने मनमानी कीमत पर प्लाट बेच दिए। यहां तक ग्रीन मद, जल मद की जमीन भी बेच दी गई। पंजीयन कार्यालय के कारिंदों ने इन जमीनों की बाकायदा रजिस्ट्री भी कर दी।
किसी प्लाट की रजिस्ट्री हो जाने पर आम आदमी समझता है कि जमीन में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। बड़ी संख्या में लोग ऐसे होते हैं जिन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं होता है कि जमीन अवैध कॉलोनी में है और भविष्य में उन्हें सड़क, बिजली, पानी से लेकर अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जूझना होगा।