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Illegal colony बेहाल खरीदार, बिल्डर मुनाफा कमा रहे…शासन हो रहा ‘कंगाल’

कछपुरा में बसे गणेश नगर का भी ये ही हाल है। यहां तो रहवासियों को रेल लाइन पार कर आवाजाही करना पड़ता है।

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Illegal colonizers ignored all rules

बीच रोड पर लगा हाइटेंशन लाइन का टावर

Illegal colony : भूकम्प कॉलोनी से लगी परसवारा, सागर फेस 2 कालोनी बस गई पर यहां सडक़ हैं ही नहीं। बिल्डरों ने धान के गहरे खेतों में चूना की लाइन डालकर सबसे सस्ते प्लॉट के झांसे में जमीन बेच दीं। जमीन खरीदने वालों ने कई ट्रक मलबा पूरकर घर तो बना लिए पर कालोनी में जल निकासी के लिए नालियां नहीं हैं। पक्की सडक़ों का निर्माण न होने से आवाजाही मार्ग हर साल बरसात के दौरान तालाब में तब्दील हो जा रहे हैं। कछपुरा में बसे गणेश नगर का भी ये ही हाल है। यहां तो रहवासियों को रेल लाइन पार कर आवाजाही करना पड़ता है।

Illegal colony : कहीं सड़क नहीं, कहीं बांस के सहारे बिजली लाइन, पेयजल की व्यवस्था गायब, पानी निकासी भी नहीं

Illegal colony : बिल्डरों ने शासन को चूना लगाया

अवैध कॉलोनियों का नुकसान जहां खरीदार को भोगना पड़ रहा है, वहीं बिल्डर शासन को चूना लगाने में भी पीछे नहीं हैं। खेत की जमीन के नाम पर सत्ती दरों पर रजिस्ट्री करा दी जाती है। ऐसे में शासन को राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ता है। भूमि के लिए विभिन्न विभागों को मिलने वाला विकास शुल्क भी बिल्डर गपा लेते हैं। बिजली विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश सहित नगर निगम को अनुमतियों के लिए मिलने वाला शुल्क भी प्राप्त नहीं होता। इतना ही नहीं, इन कालोनियों के खरीदारों को सरकारी एजेंसियों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। ऐसे में निगम और शासन के बजट का बड़ा हिस्सा भी इन अवैध कॉलोनियों के विकास में खर्च हो जाता है।

Illegal colony : वसूली का प्रावधान पर इच्छाशक्ति की कमी

अवैध कॉलोनी काटने वालों के खिलाफ एफआइआर का प्रावधान है। इनसे शुल्क वसूली के लिए कुर्की सहित ढेरों नियम कायदे हैं लेकिन सरकारी तंत्र में इ‘छाशक्ति की कमी का लाभ उठाकर बिल्डर बेधडक़ एक के बाद एक खेतों में प्लाटिंग करते जाते हैं। अब तक प्रशासन इनके खिलाफ कार्रवाई की नजीर पेश नहीं कर सका। ऐसे में अवैध कालोनी बनाने वाले बेखौफ काम में जुटे हुए हैं।

Illegal colony : अब भी रोक-टोक नहीं

दो से तीन दशकों में बसी सवा दो सौ अवैध कॉलोनियों को चिन्हित कर नगर निगम उनके विरुद्ध कार्रवाई की खानापूर्ति कर रहा है। कार्रवाई की गति इतनी सुस्त है कि इन कालोनियों में अब भी निर्माण थम नहीं रहे हैं। मनमाने निर्माण में इस बात का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है कि भविष्य में नाली, सीवर लाइन, पानी की पाइप लाइन बिछाना कैसे संभव होगा। इतना ही नहीं आवाजाही मार्ग इतने संकरे कर दिए जा रहे हैं कि उनसे होकर एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की आवाजाही भी मुश्किल होगी। इसके बावजूद निगम के राजस्व विभाग से लेकर जिला प्रशासन के राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी ऐसे अवैध निर्माणों को रोकना तो दूर उनकी जांच की जहमत भी नहीं उठा रहे हैं।