
Two Languages Taught in MP Colleges (फोटो-AI)
MP News: क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग ने एक अहम पहल शुरू की है। प्रदेश में 13 भारतीय भाषाओं में अध्ययन के लिए पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे है। इसी क्रम में बंगाली और पंजाबी भाषा के सिलेबस निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जबलपुर जिले के दो स्वशासी कॉलेजों को सौंपी गई है। इन कॉलेजों की ओर से तैयार किया गया पाठ्यक्रम प्रदेशभर के महाविद्यालयों में पढ़ाया जाएगा।
आगामी शैक्षणिक सत्र से इन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों की शुरुआत प्रस्तावित है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, बंगाली भाषा के लिए शासकीय ऑटोनॉमस मानकुंवर बाई कॉलेज और पंजाबी भाषा के लिए शासकीय ऑटोनॉमस होम साइंस कॉलेज को नोडल केंद्र बनाया गया है। इन संस्थानों के माध्यम से पाठ्यक्रम निर्माण, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों का संचालन किया जाएगा। शैक्षणिक समन्वय की भूमिका रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय निभाएगा।
भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम निर्माण के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई हैं। समिति में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा नामांकित एक प्राध्यापक को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि नोडल स्वशासी महाविद्यालय के प्राचार्य को समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है। समिति में भाषा विशेषज्ञों के साथ आईक्यूएसी का एक सदस्य भी शामिल है। मानकुंवर बाई कॉलेज में डॉ. बीएन त्रिपाठी अध्यक्ष तथा प्राचार्य डॉ. स्मृति शुक्ला समन्वयक बनाए गए हैं। वहीं होम साइंस कॉलेज में अध्यक्ष डॉ. एसएस संधु, नोडल प्राचार्य डॉ. समीर शुक्ला के साथ विशेषज्ञ डॉ. आरएस चंडोक और डॉ. विनीता नंदा को शामिल किया गया है। समिति | फरवरी-मार्च तक पाठ्यक्रम तैयार कर अपनी अनुशंसा सौंपेगी।
तैयार किए जा रहे सिलेबस को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इसमें तीन यूनिट का सैद्धांतिक पाठ्यक्रम होगा। मुख्य परीक्षा 70 प्रतिशत अंकों की होगी. जबकि 30 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित किए जाएंगे। इसके साथ ही मौखिकी (स्पोकन) प्रशिक्षण को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है, जिसके लिए परीक्षा उपरांत क्रेडिट प्रदान किए जाएंगे।
समिति के अध्यक्ष डॉ. ब्रम्हानंद त्रिपाठी ने कहा कि सिलेबस निर्माण का कार्य तेजी से किया जा रहा है, ताकि शीघ्र ही गुणवत्ता पूर्ण पाठ्यक्रम तैयार हो सके। वहीं नोडल होम साइंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. समीर शुक्ला ने बताया कि भाषा संरक्षण के साथ विद्यार्थियों को मातृभाषा में अध्ययन का अवसर मिलेगा और चार क्रेडिट के साथ प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा सकेंगे। (MP News)
Published on:
26 Jan 2026 03:02 am

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