30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्रयागराज में छोटे बच्चों को भी बेर​हमी से मारा, शारदा पीठ के शंकराचार्य का गंभीर आरोप

Shankaracharya Sadanand Saraswati- द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज आए जबलपुर, स्वामी अविमुक्तेश्वानंद का किया समर्थन

2 min read
Google source verification
Shankaracharya Sadanand Saraswati of Sharda Peeth supported Shankaracharya Avimukteshwaranand

Shankaracharya Sadanand Saraswati of Sharda Peeth supported Shankaracharya Avimukteshwaranand

Shankaracharya Sadanand Saraswati - प्रयागराज में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के साथ प्रशासनिक टकराव पर देशभर में बवाल मचा है। एक सप्ताह बाद भी यह विवाद थमा नहीं है। इस बीच द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज भी उनके समर्थन में आगे आए हैं। उन्होंने साफ कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य का सर्टिफिकेट मांगना सरासर अनुचित है। प्रशासन को इसका कोई अधिकार ही नहीं है। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने प्रयागराज की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि यहां छोटे और निर्दोष ब्राह्मण बच्चों को भी बेरहमी से मारा गया जोकि अक्षम्य है।

द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज 25 जनवरी को नर्मदा प्राकट्योत्सव पर जबलपुर पहुंचे। वे यहां अनेक कार्यक्रमों में शामिल हुए। स्वामी सदानंद सरस्वती का शहर में भव्य स्वागत किया गया। उनकी शोभायात्रा भी निकाली गई।

स्वामी सदानंद सरस्वती ने इस मौके पर मां नर्मदा की महत्ता प्रतिपादित की। उन्होंने कहा कि नर्मदा के दर्शन मात्र से मनुष्य का कल्याण हो जाता है। शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है। यहां आकर मैं धन्य हुआ।

प्रशासन को शंकराचार्य का सर्टिफिकेट मांगने का कोई अधिकार नहीं

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज मामले में स्वामी सदानंद सरस्वती ने प्रशासन व सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को शंकराचार्य का सर्टिफिकेट मांगने का कोई अधिकार नहीं है।

स्वामी सदानंद सरस्वती ने बताया कि शंकराचार्य का शिष्य ही शंकराचार्य होता है। ये उत्तराधिकार शांकर परंपरा से आता है। इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। स्वामी सदानंद सरस्वती ने बताया कि हमारे गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीजी ने मुझे और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, दोनों को ही संन्यास दिया। इस तरह वे शंकराचार्यजी के शिष्य हैं। शृंगेरी के शंकराचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अभिषेक किया। देश के 3 शंकराचार्य उनके समर्थन में हैं।

छोटे-छोटे ब्राह्मण बच्चों को भी मारा

शारदापीठ के शंकराचार्य ने साफ कहा कि प्रयागराज में प्रशासन से बड़ी चूक हुई है। वहां छोटे-छोटे ब्राह्मण बच्चों को भी मारा गया है। बच्चों के साथ मारपीट से विवाद बढ़ गया है। स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि ब्राह्मणों के साथ अत्याचार करनेवाला कभी सुखी नहीं रह सकता। निर्दोष ब्राह्मणों विशेषकर बच्चों के साथ निर्दयता करना बेहद निंदनीय है। प्रशासन को इसपर क्षमा मांगनी चाहिए।

Story Loader