jabalpur industries : यूक्रेन युद्ध का जबलपुर को मिला फायदा, बनने लगे ट्रेन के पहिए और वैगन
jabalpur industries : आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के साथ स्वदेशी की अपील के बाद देश की कई छोटी, बड़ी कंपनियों ने रुचि दिखाते हुए अलग-अलग सेगमेंट में काम करना शुरू कर दिया है। इसमें भारत की प्रमुख सेवाओं में शामिल रेल सेवा का क्षेत्र भी है। कुछ साल पहले तक जहां ट्रेन कोच के चके और एक्सेल विदेशों से मंगवाए जाते थे, वहीं अब इनका निर्माण जबलपुर में भी होने लगा है। निर्माण करने वाली कंपनी माल वाहक वैगन भी बनाती है। जो रेलवे सहित निजी कंपनियों को सप्लाई हो रहे हैं। वैगन और रेल कोच के चके बनाने वाली कंपनी पिछले दिनों आयोजित इंडियन डिफेंस कॉन्क्लेव में पहुंची थी। जहां उन्होंने रक्षा क्षेत्र में उपयेाग होने वाली वैगन और वाहनों के लिए जाने वाले कोच का डिस्प्ले किया था।
सीनियर जनरल मैनेजर शेखर पंखराज ने बताया कि उनकी कंपनी ने जबलपुर में रेल के वैगन बनाना शुरू कर दिया है जो रेलवे के अलावा कुछ निजी संस्थानों को सप्लाई हो रहे हैं। जबलपुर में हमारी फैक्ट्री ने डबल डेकर वैगन भी बनाए हैं, जिनमें कार और छोटे वाहन ट्रांसपोर्ट किए जाते हैं। कंपनी रेल व्ही और एक्सेल भी बना रही है।
जानकारी के अनुसार कुछ साल पहले तक देश में रेल के पहिए और एक्सेल यूक्रेन से आयात करता था, लेकिन उसके युद्धग्रस्त होने से यहां शॉर्टेज हो गई थी। जिसके बाद चीन से मांग मंगाया जाने लगा। एक्सपट्र्स ने बताया भारतीय रेलवे को हर साल साढ़े तीन से चार लाख के बीच ट्रेन के चक्कों की जरूरत होती है। लगातार बढ़ती मांग के बाद स्वदेशी कंपनियों ने भी इनका उत्पादन शुरू कर दिया है।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया जबलपुर में बनने वाले वैगन माल ढोने के लिए उपर्युक्त हैं। कंपनी ने डबल डेकर वैगन भी बनाई है, जिसमें छोटी कारों को ले जाया जा सकता है। इसके अलावा बड़े वाहनों व मशीनों के लिए भी अलग-अलग तरह के वैगन बना रही है।