जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित की नई प्रजाति। इसमे पोटेशियम, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, मैगनीज की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा विटामिन ए, बी, सी भी है। यह डायबिटी, हार्ट, बीपी जैसे कई रोगों से लडऩे के लिए अचूक दवा है।
जबलपुर। प्रदेश के किसानों के लिए अनाज की नई प्रजाति ‘किनोवा’ वरदान साबित हो सकती है। फूड सप्लीमेंट के रूप में ‘किनोवा’ को बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय की ओर से प्रदेश की जलवायु और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए उन्नत की गई इस प्रजाति का ट्रायल सफल रहा है। अभी इस फसल का आदिवासी बेल्ट बालाघाट, मंडला, डिंडोरी में प्रायोगिक तौर पर उत्पादन किया जा रहा था।
यह है खास
किनोवा में नौ अमीनो एसिड मिलकर प्रोटीन की संरचना बनाते हैं। इसमे पोटेशियम, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, मैगनीज की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा विटामिन ए, बी, सी भी है। जानकारों के अनुसार यह डायबिटी, हार्ट, बीपी जैसे कई रोगों से लडऩे के लिए अचूक दवा है। किनोवा के पौधे में कीटों और रोगों से लडऩे की ज्यादा क्षमता मिली है। साथ ही पाले और सूखे की स्थिति में भी यह फसल अपने आपको ज्यादा बेहतर रखने में सक्षम है।
प्रदेश में 11 लाख हेक्टेयर एरिया ऐसा है जहां एक रबी सीजन के बाद किसान दूसरी फसल नहीं ले पाते है। ऐसे में यह 11 लाख हेक्टेयर भूमि पर किनोवा पैदा हो सकता है। इससे किसानों की आय में भी इजाफा होगा। अंतरराष्ट्रीय संस्था वल्र्ड फूड आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएफओ) ने किनोवा को सुपर फूड की संज्ञा दी है। यह ऐसा फूड है जिसमें रिच न्यूट्रीशन, प्रोटीन मौजूद है।
इसलिए भी है फायदेमंद
- अक्टूबर-नवंबर में हो सकती है बुआई
- एक पौधे में 800 ग्राम से 1 किलो दाने होते हैं
- 100 दिनों में फसल पककर तैयार
- 1000 प्रति किलो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत
- 5-9 टन तक प्रति बीघा में उत्पादन
किनोवा की नई फसल को प्रदेश के मौसम के हिसाब से तैयार किया गया है। आदिवासी क्षेत्र में प्रायोगिक ट्रायल कर रहे थे जो कि सफल रहा है। किनोवा अनाज बेहतरीन न्यूट्रीशनल रिच फूड है।
डॉ. जीके कौतू, अनुसंधानकर्ता, कृषि विवि