
MK-84 Air Bombs (Photo Source - Patrika)
MP News: जबलपुर आने वाले समय में 1000 किलोग्राम क्षमता वाले स्वदेशी एमके-84 एयर बम के उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। ऑर्डनेंस फैक्ट्री जबलपुर (ओएफजे) के पास इस प्रकार की बम बॉडी की ढलाई की क्षमता पहले से मौजूद है, जबकि आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) एयर बम में बारूद भरने का कार्य करती है। भारतीय वायुसेना की ओर से स्वदेशी एयर बम निर्माण के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी किए जाने के बाद इस दिशा में संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
भविष्य में करीब 600 बमों की खरीदी का प्रस्ताव है, जिससे जबलपुर को बड़ा औद्योगिक लाभ मिल सकता है। ओएफजे पहले भी इसी आकार और लंबाई की बम बॉडी की ढलाई का प्रयोग कर चुकी है, हालांकि उस समय परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब वायुसेना की नई पहल के तहत सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों को इसमें शामिल होने का अवसर मिलेगा। यदि आयुध निर्माणी खमरिया इसमें भागीदारी करते हुए बारूद भरने का कार्य संभालती है, तो ओएफजे को बम बॉडी निर्माण का काम मिलने की संभावना है, जिससे दोनों इकाइयों को फायदा होगा।
आयुध निर्माणी खमरिया में पहले से कई प्रकार के एयर बम बनाए जा रहे हैं, जिनमें 1000 पाउंडर (1000 एलबीएस), 250 किग्रा, 450 किग्रा और 100- 120 किग्रा एरियल बम शामिल हैं। यदि ओएफजे में बम बॉडी का निर्माण होता है, तो खमरिया में बारूद भरने का कार्य भी बढ़ेगा, जिससे उत्पादन क्षमता और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकती है।
एमके-84 श्रेणी का एयर बम अत्यंत विध्वंसकारी होता है। इसे विमान से गिराए जाने पर भारी विस्फोट के साथ जमीन में गहरा गड्ढा बन जाता है और आसपास का क्षेत्र हिल जाता है। इसका उपयोग दुश्मन के बंकर, पुल और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया जाता है।
वर्तमान में जबलपुर एयर बम उत्पादन के क्षेत्र में देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन 1000 किग्रा एमके-84 बम का उत्पादन अभी नहीं होता और इसे आयात करना पड़ता है। यदि इसका स्वदेशी उत्पादन शुरू होता है, तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी। ओएफजे फिलहाल 250 किग्रा एयर बम की बॉडी की ढलाई कर रही है और हाल ही में लगभग 80 करोड़ रुपए का उत्पादन किया है, जिसमें इस बम का बड़ा योगदान रहा। पूर्व में यंत्र इंडिया लिमिटेड ने 1000 किग्रा बम बॉडी निर्माण के लिए 110 करोड़ रुपए के निवेश की योजना बनाई थी, जिसमे फोर्जिंग और मेल्टिंग प्लांट स्थापित किया जाना था। हालांकि इस दिशा में सीमित प्रगति हुई और कुछ सीएनसी मशीनें ही लाई जा सकीं।
1000 किलो एयर बम की बॉडी की ढलाई सफलतापूर्वक की जा चुकी है। यह आरएंडडी प्रोजेक्ट में शामिल है। इसके लिए पर्याप्त सुविधाएं निर्माणी के पास उपलब्ध हैं। भविष्य में इसकी ढलाई का ऑर्डर मिलता है, तो इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।- हेमंत पाखले, जनस्पर्क अधिकारी, ऑर्डनेंस फैक्ट्री जबलपुर
Updated on:
06 Apr 2026 06:00 pm
Published on:
06 Apr 2026 05:59 pm
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