-बोलीं मिसेज इंडिया निमिषा
जबलपुर. 'किसी से दो शब्द अच्छे से, प्यार से बोलने में कुछ नहीं जाता, इसलिए हमेशा सभी से अच्छे से मिलो। लोग आपके व्यवहार को ही याद रखते हैं।एक महिला होने के नाते मेरी जिम्मेदारी घर और बाहर दोनों की है। मिसेस इंडिया के फाइनल राउंड में हमसे कहा भी गया था कि हमें मॉडल नहीं रोल मॉडल की तलाश है। आज भी घर पर मैं मिसेस इंडिया नहीं, वहां मां हूं, पत्नी हूं और इस लिहाज से मेरी जो जिम्मेदारियां हैं उन्हें निभाती हूं।' ऐसा मानना है मिसेज इंडिया निमिषा सक्सेना का। वह एक समारोह में शामिल होने जबलपुर पहुंची थीं। बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने ये बातें शेयर कीं। मीडिया से बातचीत में कहा कि व्यक्ति को हमेशा धरातल पर रहना चाहिए। मैंने हमेशा इस बात का ध्यान रखा है। कभी किसी का अपमान नहीं किया।
मिसेस इंडिया 2019-20 निमिषा ने कहा कि सपने देखना कभी छोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि हम यह नहीं जानते कि न जाने कब इनके पूरा होने का समय आ जाए। ऐसे में हमेशा सकारात्मक सोच के साथ अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करते रहें।
निमिषा ने बताया कि वो उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के पास एक छोटी सी जगह बीसलपुर से हैं। माता-पिता दोनों ही शिक्षक थे। उस समय दिमाग में बस यही था कि पढ़ना है। हां, ये जरूर है कि टीवी पर न्यूज एंकर को देखकर सोचा करती थी कि मुझे भी न्यूज एंकर बनना है। स्टूडेंट लाइफ में ही सुष्मिता सेन और एश्वर्या राय मिस यूनिवर्स और मिस वर्ल्ड बनी थीं। इन्हें देखकर लगता था कि काश मैं भी क्राउन पहन पाती। लेकिन उस समय न तो इंटरेनट ही था और न ही स्मार्ट फोन जैसी सुविधाएं, तो जितनी जानकारियां हम लोगों तक बीसलपुर में पहुंचती थी उतनी की काफी हुआ करती थीं।
वो बोलीं, मेरे मॉडलिंग करियर की शुरुआत मिसेस भोपाल से हुई। यूं ही दोस्तों के कहने पर मिसेस भोपाल का आवेदन कर दिया और शामिल हो गई। जब मिसेस भोपाल चुन ली गई तो फिर सफर और आगे बढ़ता गया। आगे चलकर मिसेस एमपी बनी। फिर मिसेस सेंटर इंडिया। इसके बाद मिसेस इंडिया के लिए पार्टीसिपेट किया। पता था कि राष्ट्रीय स्तर की यह प्रतियोगिता कठिन होगी। परिवार और पति ने बहुत साथ दिया। एक महिला तभी आगे बढ़ सकती है जब उसका पति और परिवार साथ दे। बस, सभी के साथ से मिसेस इंडिया का खिताब भी मिल गया। मेरा क्राउन पहनने का सपना तो पहले ही पूरा हो गया था पर मिसेस इंडिया के क्राउन ने मुझे मेरी अपनी पहचान दी।