
जबलपुर। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद सिहोरा विधानसभा से बगावती तेवर दिखाते हुए चुनाव मैदान में उतरीं पूर्व मंत्री कौशल्या गोंटिया का नामांकन सोमवार को जांच में खारिज हो गया। वे चुनाव जीतने की बात कहते हुए टिकट मांग रहीं थीं। उनका कहना था कि जनता उनके साथ है, लेकिन नामांकन दाखिल करने के लिए उन्हें चार प्रस्तावक तक नहीं मिले। वहीं, पूर्व विधानसभा से नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनकर व पूर्व एमआइसी सदस्य लक्ष्मी प्रसाद बेन का नामांकन भी बी फार्म नहीं होने के कारण खारिज हो गया। इसके अलावा जिले की आठ विधानसभा के 18 उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए। तीनों ने कांग्रेस की ओर से नामांकन दाखिल किया था। अब केवल 133 उम्मीदवार शेष बचे हैं। 14 नवम्बर को नाम वापसी का आखिरी दिन रहेगा।
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तीनों नामांकन बी फार्म नहीं होने के चलते खारिज
कांग्रेस की बागी पूर्व मंत्री कौशल्या, राजेश व लक्ष्मी का नामांकन खारिज
जिला निर्वाचन कार्यालय में नामांकन पत्रों की जांच की गई। इसमें पाटन विधानसभा क्षेत्र से एक उम्मीदवार रोहित पटेल का नामांकन विधिमान्य न होने की वजह से निरस्त कर दिया गया। अब यहां 19 उम्मीदवार शेष हैं। बरगी से किसी का भी नामांकन निरस्त नहीं हुआ। यहां सभी 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पूर्व विधानसभा क्षेत्र के लिए चार उम्मीदवारों शंकर वंशकार, लक्ष्मी प्रसाद, राजेश सोनकर और विजय घनघोरिया के नामांकन निरस्त होने के बाद यहां 11 उम्मीदवार शेष है।विधानसभा क्षेत्र उत्तर से देवेन्द्र कुमार शर्मा, महेश पटेल, प्रदीप विश्वकर्मा और महमूद के नामांकन निरस्त हो गए।
केंट विधानसभा
केंट विधानसभा से वीरेन्द्र दुबे, चन्द्रप्रकाश भटनागर, दिनेश कुमार यादव, शशिकांत विश्वकर्मा, अमजद खान और विनय कुमार जैन के नामांकन खारिज हुए।
पश्चिम व पनागर और सिहोरा
जबलपुर पश्चिम से संवीक्षा के दौरान राजेश पटेल, पनागर से चंद्रमणी का नामांकन खारिज हुआ। पश्चिम में अब 15, पनागर 18 तथा सिहोरा विधानसभा क्षेत्र से नौ उम्मीदवार चुनाव मैदान में शेष रह गए हैं।
प्रारूप-5 में देना होगा नाम वापसी का नोटिस
विधानसभा चुनाव के लिए अभ्यर्थी को अपनी उम्मीदवारी से नाम वापस लेने के लिए प्रारूप-5 में हस्ताक्षरित नोटिस रिटर्निंग अधिकारी को देना होगा। यह नोटिस उम्मीदवारी की वापसी के लिए नियत अंतिम तारीख को दोपहर तीन बजे तक हर हाल में देना होगा। एक बार नाम वापसी का नोटिस रिटर्निंग अधिकारी को सौंपने के बाद उसे किसी भी सूरत में वापस भी नहीं लिया जा सकेगा।