
जबलपुर. एनआरआई कोटा के नाम पर प्राइवेट कालेजों में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। इस मामले में लगाई गई याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई भी चल रही हे। कोर्ट ने इस संबंध में एक सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई में सरकार की ओर से बयान दिया गया। यहां बताया गया कि प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में विगत 10 सितंबर की रात में एमबीबीएस की सीटों पर एनआईआर और मप्र के मूल निवासी कोटे में दिए गए एडमीशन से संबंधित रिकार्ड सीज कर लिया गया है। जस्टिस आरएस झा और जस्टिस नंदिता दुबे की युगलपीठ ने एमसीआई को भी जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कालेजों पर लगाए आरोप
खण्डवा के छात्र प्रान्शु अग्रवाल व अन्य की ओर से दायर की गईं याचिकाओं पर विगत 10 नवम्बर को कोर्ट में सुनवाई हुई थी। इन छात्रों ने एमबीबीएस कोर्स की तीसरे दौर की 10 सितंबर की दोपहर और फिर उसी दिन शाम को चौथे दौर की हुई काउंसलिंग पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि तीसरे दौर की काउंसलिंग में दिन में 163 सीटों को ब्लॉक किया गया और रात 7-३० बजे शुरु हुई चौथे दौर की मॉप अप राउण्ड की काउंसलिंग में इनमें से 94 सीटों पर एडमीशन दिए गए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि रात को जारी हुई मैरिट सूची में से किसी भी छात्र को इन 94 सीटों पर एडमीशन नहीं दिया गया। इन सीटों पर एडमीशन उन छात्रों को दिया गया, जिनके करीब दो सौ अंक थे और जो मध्य प्रदेश से बाहर रहने वाले छात्र थे। जो छात्र एनआरआई की परिभाषा में भी नहीं आते उन्हें भी एडमीशन दे दिए गए। याचिका में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के प्रमुख सचिव व डीएमई सहित अरविंदो मेडिकल कालेज, चिरायु मेडिकल कालेज, आरडीगार्डी मेडिकल कालेज, एलएन मेडिकल कालेज, पीपुल्स मेडिकल कालेज को पक्षकार बनाया गया है।
एक सप्ताह बढ़ी सुनवाई
याचिका पर 10 नवम्बर को हुई सुनवाई के बाद युगलपीठ ने 10 सितंबर की काउंसलिंग की अंतिम राउंड में दिये गये प्रवेश संबंधी पूरा रिकार्ड सीज करने के निर्देश डीएमई को दिए थे। उप महाधिवक्ता आनंद बर्नाड ने युगलपीठ को बताया कि पूर्व आदेश के पालन में समस्त दस्तावेज जब्त कर लिये गये हैं, जिनकी स्क्रूटनी जारी है। इस पर युगलपीठ ने सुनवाई एक सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दी।