व्हीकल फैक्ट्री से 2 हजार वाहनों के निर्माण का कार्य छिनने का अंदेशा
जबलपुर। भारतीय सेना के लिए जल्द ही निजी कंपनी खास युद्धक वाहन तैयार करेगी। अभी तक इन युद्धक विमानों का निर्माण व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में होता है। लेकिन कोर और नॉनकोर का पेंच फंसने के बाद वीएफजे से ये काम छिनकर निजी कंपनियों के हाथों में जाने की संभावना बढ़ गई है। इसकी एक वजह युद्धक वाहन के निर्माण की लागत में आने वाला बड़ा अंतर है। नॉन कोर श्रेणी में सूचीबद्ध किए जाने के बाद इन वाहनों के निर्माण के लिए ओपन टेंडर किए जाने की तैयारी है।
एक निजी कंपनी ने प्रति युद्धक विमान 20 लाख रुपए में तैयार करने का प्रस्ताव दिया है। ये लागत राशि वीएफजे में निर्माणाधीन युद्धक वाहन की लागत से करीब 8 लाख रुपए कम है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि इन युद्धक विमानों के निर्माण का कार्य आने वाले समय में वीएफजे के हाथ से निकलकर निजी कंपनियों के खाते में चला जाएगा।
इस नीति से वीएफजे की हालत खराब
रक्षा मंत्रालय ने एलपीटीए-2226, स्टेलियन-4572 और 4569 कोर और नॉन कोर की श्रेणी में डाल दिया है। इसके चलते भविष्य में इन उत्पादों का वर्क ऑर्डर ओपन टेंडर के जरिए होगा। वाहन निर्माणी का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी बड़ा और महंगा है। ऐसे में अपेक्षाकृत सस्ते मैन पॉवर और बुनियादी सुविधाओं का उपयोग करने वाली निजी कंपनियों के सामने निर्माणी का टिक पाना बेहद मुश्किल होगा। इसके चलते वीएफजे में बनने वाले दो प्रमुख उत्पाद का निर्माण का वर्क ऑर्डर निजी कंपनियों को मिलना तकरीबन तय माना जा रहा है।
ये ही है वीएफजे की रीढ़
रक्षा क्षेत्र में निजी निवेश को मंजूरी के बाद कई बड़े बदलाव हुए है। केंद्र सरकार पहले ही वीएफजे को आगे के लिए इंडेंट देने से मना कर चुकी है। वीएफजे को ओपन मार्केट में उतरकर काम हासिल करना होगा। ऐसे में निजी कंपनियों से मुकाबला वीएफजे के लिए चुनौतिपूर्ण बन गया है। वीएफजे में अभी तक सेना के लिए तैयार किए जाने वाले एलपीटीए और स्टेलिन का वाहन का निर्माण ही मुख्य रुप से होता रहा है। लेकिन आने वाले समय में निजी कंपनियों की दस्तक से ये काम भी वीएफजे से छिनने की आशंका बन गई है।
मौजूदा टारगेट
आयटम यूनिट वैल्यू उत्पादन लक्ष्य
स्टेलियन-4572 28 लाख 778
स्टेलियन-4569 28 लाख 4,569
एलपीटीए- 2226 20.50 लाख 1,814