छोटी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसका अंदाजा 12 साल के बच्चे के साथ हुई घटना से लगाया जा सकता है। जिसके द्वारा अनायास ही निगली गई पेपर पिन जाकर फेफड़े में फंस गई थी।
paper pin in lungs : छोटी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसका अंदाजा 12 साल के बच्चे के साथ हुई घटना से लगाया जा सकता है। जिसके द्वारा अनायास ही निगली गई पेपर पिन जाकर फेफड़े में फंस गई थी। असहनीय दर्द होने पर जांच की गई तो इसका पता चला। जबलपुर मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन कर दो इंच लम्बी पेपर पिन को निकालकर डॉक्टरों ने उसके जीवन को बचाया।
अमरकंटक के छात्र भुवनेश्वर (12) को दो सप्ताह पहले सीने में दर्द हुआ। परिवार ने पहले अमरकंटक फिर शहडोल में जांच कराई पर कुछ पता नहीं चला। प्रथम दृष्टया हार्ट का मामला लग रहा था, इसलिए परिजन हार्ट स्पेशलिस्ट को दिखाते रहे। दर्द बढ़ता जा रहा था। उसे सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के अस्पताल के ईएनटी विभाग में दिखाया। बच्चे का एक्स-रे लिया तो उसमें दो इंच की पेपर पिन फंसी नजर आई। इससे अंदर घाव भी बन गया था। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ.अनिरुद्ध शुक्ला के अनुसार बच्चे की जान को पिन से खतरा हो सकता था। इसे देखते हुए तुरंत ऑपरेशन कर सफलतापूर्वक पिन को बाहर निकाला। पिन के हार्ट में पहुंचने का भी खतरा था, इसे देखते हुए हृदय रोग विशेषज्ञ को भी साथ में रखा गया था।
बच्चे को पिन निगल जाने की घटना पहले याद भी नहीं थी। जांच रिपोर्ट आने पर उसने बताया कि दो माह पहले मुंह में पिन को दबाए काम कर रहा था। इसी दौरान हल्की खांसी का ठसका लगा और झटके से पिन अंदर चली गई। उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया फिर इस बारे में याद भी नहीं रहा। दर्द होने पर भी उसे यह अंदाजा नहीं था कि पिन उसके पेट में चली गई है। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे को धंसका लगने से पिन आहार नली की जगह श्वांस नली से होकर दाहिनी फेंफड़े में पहुंच गई थी, जिसका पता एक्सरे जांच से चला।