
जबलपुर। हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण से जुड़ी एक अवमानना याचिका सारहीन पाते हुए निरस्त कर दी। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई है। कोर्ट ने कहा कि जुर्माने की राशि मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के बैंक खाते में जमा कराई जाए।
सिंगरौली निवासी बृजेश कुमार शहवाल ने अवमानना याचिका दायर कर बताया कि डिवीजन बेंच ने ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों में 4 अगस्त 2023 को निर्देश दिए थे 4 सितंबर को सुनवाई नियत करें। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि रजिस्ट्रार ने प्रकरण सूचीबद्ध नहीं किया। याचिका में रजिस्ट्री के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा किसी भी प्रकरण को आदेश के बावजूद लिस्ट नहीं करने के कई कारण होते हैं। जानबूझकर या दुर्भावनावश ऐसा नहीं किया जा रहा। हाईकोर्ट में साढ़े चार लाख से अधिक प्रकरण लम्बित हैं। ऐसे में अधिवक्ता की ओर से मांग किए जाने पर यथार्थ रूप से प्रत्येक मामले को लिस्ट नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस तरह तो कोई मामला सूचीबद्ध होता है और अधिवक्ता हाजिर नहीं होता, तो उसे भी अवमानना मानना चाहिए। इस मत के साथ कोर्ट ने अवमानना याचिका खारिज कर दी।
कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे में मकान तोड़ने पर रोक
भोपाल की कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे में आने वाले रहवासियों के मकान तोड़ने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए भोपाल नगर निगम को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए। याचिका की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।
कलियासोत नदी के पास स्थित एक रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स के रहवासियों ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि उन्होंने अपने जीवन भर की जमा पूंजी से फ्लैट्स खरीदे थे, लेकिन भोपाल नगर निगम उन्हें हटाने की एकपक्षीय कार्यवाही कर रहा है।
एनजीटी के निर्देश पर नगर निगम ने कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे में आ रहे निर्माण करने वालों को नोटिस दिये थे। लगभग 700 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। रहवासियों का कहना है कि नगर निगम सहित अन्य एजेंसियों की अनुमति के बाद ही मकान का निर्माण किया गया था। हाईकोर्ट ने फिलहाल रहवासियों को हटाने की कार्यवाई पर रोक लगा दी है और मामले पर भोपाल नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।