देश भर से आए साढ़े नौ सौ से अधिक जनप्रतिनिधियों के सामने बोले
जबलपुर। केंद्र सरकार के एक मंत्री ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी योजना को सैकड़ों जनप्रतिनिधियों के सामने उजागर कर दिया। राष्ट्रीय पंचायत दिवस के अवसर शहर में पंचायत चौपाल का आयोजन किया गया था। चौपाल में देश की चुनी हुइ पंचायतों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय ग्रामीण एवं पंचायत राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री तोमर ने प्रधानमंत्री की एक महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी भी सभी की सामने रख दी। पीएम की इच्छा और इरादें को जानकर पंचायत चौपाल में आए जनप्रतिनिधि भी हैरान रह गए।
दिल्ली से निकले बाहर
पंचायत चौपाल का बतौर मुख्य अतिथि शुभारंभ करते हुए केंद्रीय मंत्री तोमर बोले कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा शक्ति के कारण ही दिल्ली की एसी व्यवस्था के बीच भाषण, पुरस्कार तक सीमित रहे पंचायती राज दिवस का आयोजन अब आमजनों के बीच हो रहा है। इसका उद्देश्य महज इतना है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक के प्रतिनिधियों के विकासोन्मुखी विचार आपस में साझा हों। चर्चा से सारगर्भित निष्क र्ष निकले जो पंचायतों को मजबूत करने में सक्षम हो और देश का समग्र विकास हो सके। वे लोकतंत्र की पाठशाला को मजबूत करने के लिए प्रयत्नशील हैं। नया भारत बनाने हम सभी को योगदान करना होगा।
आगे बढऩे से कोइ रोक नहीं सकता
केंद्रीय मंत्री के अनुसार राष्ट्रीय पंचायत में देशभर से आए साढ़े नौ सौ से ज्यादा जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि ढाई लाख सरपंच मजबूत नेतृत्व देंगे तो देश को आगे बढऩे से कोई नहीं रोक सकता। पीएम ने इसी पर ध्यान केन्द्रित किया है। यही वजह है की पिछले साल लखनऊ में और इस बार जबलपुर व मंडला में पंचायती दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
ये चाहते है पीएम
केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि जब शौचालयों की बात की तो लोग कहते थे की पीएम शौचालय की बात करते हैं, उन्हें बड़ी बात करना चाहिए। लेकिन अगर वे छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते तो आजादी के 140 साल बाद भी तस्वीर नहीं बदलती। आप सभी देशभर से यहां जुटे हैं तो आपके बीच प्रधान सेवक मोदी भी मंडला आ रहे हैं। वे गांवों का कायाकल्प करना चाहते हैं।
अगले वर्ष सभी गांव ओडीएफ
केन्द्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के प्रयास से साढ़े तीन लाख गांव अब तक ओडीएफ हो चुके हैं। 2019 तक सभी गांव ओडीएफ हो जाएंगे।