जबलपुर के ग्वारीघाट पर होने वाली नर्मदा महाआरती में आज राष्ट्रपति होंगे शामिल , रोजाना श्रद्धा और भक्ति का संगम उमड़ता है।तमाम लोग नियमित रूप से महाआरती में शामिल होते हैं।विशेष आयोजनों पर शामिल होने के लिए भी भीड़ उमड़ती है।
जबलपुर। पुण्य सलिला मां नर्मदा की महाआरती दस साल पहले हरिद्वार और वाराणासी में गंगा तट पर होने वाली महाआरती की तरह शुरू की गई थी। वसंत पंचमी-2012 से शुरू महाआरती का स्वरूप दिन-प्रतिदिन भव्य होता जा रहा है। महाआरती में मां नर्मदा की आराधना के साथ नर्मदा को साफ-सुथरा रखने का संकल्प भी दिलाया जाता है। इस कारण यहां होने वाली महाआरती की देश में अलग पहचान है।
महाआरती के संस्थापक संयोजक ओंकार दुबे के अनुसार महाआरती के माध्यम से अब तक 26 लाख लोगों को स्वच्छता का संकल्प से जोड़ा जा सका है। इसी का प्रतिफल है कि जबलपुर में मां नर्मदा कांच की तरह साफ-सुथरी है। आस्था के इस प्रमुख केंद्र ग्वारीघाट को सरकार की ओर से पवित्र तीर्थ क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया है। ओंकार दुबे बताते हैं कि तीन फरवरी 2012 बसंत पंचमी से महाआरती प्रारम्भ हुई। पहले दिन से ही यह निर्णय लिया गया कि आरती में सम्मिलित होने वाले भक्तों को निर्मल नर्मदा का संकल्प दिलाया जाएगा।
महाआरती में यजमान के रूप में ये हो चुके हैं शामिल
महाआरती में मुख्य यजमान के रूप में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, देश के गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व संघ चालक केएस सुदर्शन सहित देश की कई प्रमुख हस्तियां महाआरती में सम्मिलित हो चुके हैं।
एक प्राकृतिक शहर की मनुहार आपसे... मां नर्मदा को बचा लें!
मान्यवर! आप संस्कारधानी की खूबसूरत सरजमी पर पधारे। इसका अनुभव करके ही हर शहरवासी रोमांचित है। आखिर हो भी क्यों ना? आपका यहां पधारना, मां नर्मदा के तट पर आरती में शामिल होना, यह सब मामूली नहीं है। आजादी के बाद से राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से महाहिम का यहां होना बेहद महत्वपूर्ण क्षणों में से एक है। लाखों शहरवासियों की आपसे मनुहार है कि मां नर्मदा को बचा लेें। देशभर की तमाम नदियों की तरह मां नर्मदा भी संकट में हैं। इनके उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर जबलपुर पहुंचते तक तमाम जगह अवैध खनन की मारामारी मची हुई है। जबलपुर जिले की सीमा में तो गंदे नालों और गौर-परियट जैसी नदियों का पानी अमृत तुल्य नर्मदा जल को प्रदूषित कर कर रहा है। आप की ‘दूरदृष्टि’ से केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों में मां नर्मदा को शामिल कर लिया जाए, तो यह संस्कारधानीवासियों पर बड़ी कृपा होगी। इस शहर की तासीर में मां नर्मदा रिसती हैं। लोग नर्मदा को मां मानते हैं। ऐसे में इनका कल-कल बहते रहना प्रदेश के लिए जरूरी है।