जबलपुर

प्राइवेट अस्पताल कोरोना इलाज के नाम पर लूट की छूट नहीं, हाईकोर्ट ने कहा नहीं कर सकते मनमानी वसूली

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : कोर्ट मित्र के सुझावों पर कोर्ट गम्भीर

2 min read
Sep 03, 2020

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी कर कहा कि राज्य के निजी अस्पताल कोरोना के इलाज के नाम पर मनमानी वसूली नहीं कर सकते। विभिन्न वर्ग के मरीजों के लिए मानक निर्धारित होने चाहिए। चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल व जस्टिस सुजय पॉल की डिवीजन बेंच ने कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ की ओर से पेश महत्वपूर्ण सुझावों को गम्भीरता से लिया। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए कि इन सुझावों के संदर्भ में अपना जवाब पेश करें।

यह है मामला
शाजापुर के एक वयोवृद्ध गरीब मरीज को निजी अस्पताल में इलाज का शुल्क न चुका पाने के कारण पलंग से बांधे जाने के मामले की हाइकोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। इस मामले का दायरा व्यापक कर कोर्ट ने प्रदेश के निजी अस्पतालों में गरीब तबके के मरीजों के इलाज के लिए गाइड लाइन निर्धारित किए जाने के संबंध में गंभीरतापूर्वक विचार कर रहा है। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र बतौर वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सुझाव दिए गए कि नियमानुसार निजी अस्पताल कोरोना के मरीजों से वही शुल्क वसूल सकते हैं, जो कि जायज है। न कि मनमर्जी से इलाज का खर्च वसूला जाए। ऐसी कई शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें निजी अस्पतालों ने भारी-भरकम बिल वसूल लिए।

मरीजों की हैसियत देखकर जमकर चार्ज करने का रवैया तो अनुचित है ही साथ ही मध्यमवर्गीय व गरीब तबके के मरीजों के साथ भी ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जा सकती। प्रावयेट रूम, ऑक्सीजन वार्ड, आईसीयू, वेंटीलेटर आदि को लेकर आयुष्मान कार्ड योजना में रेट निर्धारित हैं। इसके बावजूद उससे अधिक वसूली जारी है। इसलिए कोर्ट सख्ती से निजी अस्पतालों को नियमानुसार शुल्क लेने के निर्देश दे। सुनवाई के बाद कोर्ट ने इन पर सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। केंद्र सरकार की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल जेके जैन व राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके वर्मा उपस्थित हुए।

Published on:
03 Sept 2020 12:32 pm
Also Read
View All