प्रशासन ने 7 दिन में फीस वापसी सहित अन्य मांगों पर ठोस निराकरण करने का भरोसा दिया है।
private schools Fee : निजी स्कूलों में ज्यादा वसूली गई फीस वापस करने की मांग को लेकर अभिभावकों की घंटाघर के पास भूख हड़ताल चल रही है। चौथे दिन गुरुवार को अनशन पर बैठे एक अभिभावक की हालत बिगड़ गई। वे बेहोश हो गए। सूचना लगते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्हें विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने 7 दिन में फीस वापसी सहित अन्य मांगों पर ठोस निराकरण करने का भरोसा दिया है।
अनशन स्थल पर दोपहर में अभिभावकों से मिलने एसडीएम आरएस मरावी पहुंचे। उन्होंने अभिभावकों से चर्चा की। अभिभावकों ने जिला प्रशासन की अब तक की कार्रवाई के प्रयासों को सराहा लेकिन 10 माह में भी फीस वापस नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। अफसरों ने फीस जमा नहीं करने वाले अभिभावकों की सूची मांगी और अनशन खत्म करने की बात कही। इस पर बहस भी हुई। अभिभावकों ने कहा कि अनशन खत्म नहीं होगा। शुक्रवार को चक्का जाम किया जाएगा।
शाम को पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता की हालत बिगड गई और वे बेहोश हो गए। खबर लगने पर मौके पर तहसीलदार और ओमती थाने के टीआई आए। गुप्ता को विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती किया गया। अभिभावक विकास पॉल, अविनाश गर्ग, तेजभान मिश्रा, अमित ने कहा कि प्रशासन स्कूलों को आदेशित करे कि जब तक मामला कोर्ट में है फीस नहीं ले।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचरियों की हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया है। गुरुवार को नोटिस जारी किया गया है। हड़ताल करने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय शैक्षणेत्तर कर्मचारी संघ व अनुसूचित जन जाति, पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संघ 7 जनवरी को अनशन स्थगित कर चुका है। लेकिन कुछ कर्मचारी भी अभी भी डटे हुए थे। इस कारण विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। विश्वविद्यालय में परीक्षाएं भी चल रही हैं। साथ ही विश्वविद्यालय की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लगातार 24 दिन से विवि में कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं।