जबलपुर

बारूद की फैक्ट्री में ये बड़ा खतरा, कभी भी जल सकता है शहर

आयुध निर्माणी खमरिया में हादसे के दौरान बनी सकती है विषम स्थिति

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Apr 07, 2018
Serial bomb blast warning in ordnance factory

जबलपुर। सेना के लिए बम बनाने वाली ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) का बारूद शहर के लिए कभी भी आफत की वजह बन सकता है। यदि कभी हादसा हुआ तो फायर बिग्रेड पर ही सवाल खड़े हो जाएंगे। दरअसल यहां अग्निशमन वाहनों को चलाने वाले ड्राइवरों की कमी है। नियमित ड्राइवर पहले से ही कम हैं। अब ठेके के ड्राइवर भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह ठेका प्रक्रिया का समय पर पूरा नहीं होना बताया जा रहा है। बीते आठ महीनों से कई कारणों से यह कार्रवाई अटकी है। एेसे में यदि कोई बड़ी घटना हो जाए तो विभाग को उसे संभालना मुश्किल हो सकता है।

सबसे अहम है विभाग
ओएफके में अग्निशमन सबसे महत्वपूर्ण विभागों में शामिल है। क्योंकि बारूद संबंधी काम होने के कारण आग लगने की छोटी-बड़ी घटनाएं होना आम होता है। बढ़ते तापमान के कारण इनमें इजाफा हो जाता है। इसी समय विभाग ड्राइवरों की कमी झेल रहा है। एेसे में खतरा बना रहता है। सूत्रों ने बताया कि विभाग में ड्राइवरों के करीब 19 पद स्वीकृत हैं। इनमें अभी 11 ही नियमित ड्राइवर हैं। बांकी ठेका पद्धति के माध्यम से रखे जाते हैं। अब पहले का ठेका समाप्त हो गया है।

छ: महीने में पूरी नहीं हुई प्रक्रिया
नया ठेका की प्रक्रिया बीते करीब छह माह से चल रही है, लेकिन पूरी आज तक नहीं हो सकी है। एेसे में बचे ड्राइवरों की मुसीबत बन गई है। उन्हें अतिरिक्त कार्य के साथ-साथ नियमित अवकाश से भी वंचित होना पड़ता है। विभाग की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि कोई बड़ी घटना हो जाए तो उसे कैसे संभाला जाए। बताया जाता है कि लेखा अनुभाग की कई प्रकार की आपत्ति के अलावा दूसरे कारणों से ठेका प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इस पर फैक्ट्री प्रबंधन के द्वारा गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

इनका कहना है
ओएफके में अपर महाप्रबंधक बीपी मिश्रा के अनुसार ठेका प्रक्रिया पूरी करने के लिए कई प्रकार की कार्रवाई करनी पड़ती है। कई कारणों से इसमें देरी जाती है। जहां तक ड्राइवर की कमी की बात है तो पुराने ठेकेदार के कुछ ड्राइवर की सेवाओं को विस्तारित किया गया है।

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Published on:
07 Apr 2018 09:34 am
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