Shani Jayanti : हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन शनि जयंती मनाई जाती है।
Shani Jayanti : हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इस विशेष दिन पर शनि देव की उपासना करने से साधक को रोग, दोष और बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है। शनि जयंती पर्व 27 मई को मनाया जाएगा। इस बार शनि जयंती पर्व पर दुर्लभ सुकर्मा योग, सर्वार्थसिद्धि योग व शिववास योग का विशेष संयोग बन रहा है।
Shani Jayanti : ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार इसका असर हर राशि पर पड़ेगा। मिथुन, मेष, तुला, सिंह व कुंभ राशियों के लिए यह संयोग विशेष शुभफलदायक होगा। ज्योतिषाचार्यों ने अन्य राशियों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है। शनि जयंती को शनिदेव की ढैया व साढ़ेसाती महादशा निवारण के लिए सर्वोत्तम अवसर माना जाता है। इसके लिए सारा दिन अनुष्ठान होंगे। नर्मदा तट व शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। ज्योतिषाचार्य सौरभ दुबे ने बताया कि शनि जयंती के दिन ही ज्येष्ठ अमावस्या और वट सावित्री व्रत का त्योहार भी मनाया जाएगा। महिलाएं वट सावित्री व्रत रखकर पूजन करेंगी।
ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला ने बताया कि शनि जयंती पर प्रात:काल से ही दुर्लभ सुकर्मा योग का निर्माण हो रहा है। इसे बहुत ही शुभ योग माना जाता है। इस योग का समापन रात 10.54 बजे होगा। इस योग में भगवान शिव और शनिदेव की पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है। शनि जयंती के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग है। यह सुबह 05.25 बजे से 05.32 बजे तक है। इस दिन शिववास योग सुबह 08.31 बजे तक है। इन योगों के कारण शनि जयंती बहुत ही महत्वपूर्ण रहने वाली है।