
जबलपुर. जिले के थानों की पुलिस की हीलाहवाली रोजाना सामने आ रही है। इसी के चलते सेना के एक जवान के परिवार को भी परेशान होना पड़ा। अम्बाला में पदस्थ सेना के एक जवान को रांझी में रहने वाले अपने परिवार की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मदद मांगनी पड़ी। उन्होंने कार्रवाई का निर्देश देते हुए आश्वस्त किया कि उनके परिवार की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उसके बाद स्थानीय पुलिस की नींद टूटी और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद परिवार ने राहत की सांस ली।
पंजाब के अम्बाला में पदस्थ सुंदर सिंह भाटी ने सीएम को ट्वीट करके लिखा था कि जबलपुर में उनकी पत्नी, दो बेटियां, एक बेटा और बुजुर्ग मां रहती हैं। वहां कुछ उपद्रवी तत्व उन्हें परेशान कर रहे हैं। आए दिन मारपीट करते हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती। भाटी का ट्वीट मिलते ही सीएम ने जबलपुर कलेक्टर-एसपी को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। भाटी को री-ट्वीट कर आश्वस्त किया कि उनके परिवार की सुरक्षा प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। सीएम ने यह भी कहा कि एमपी में किसी की गुंडागर्दी नहीं चलेगी। अपराधियों की जगह जेल होगी। सीएम के निर्देश पर रांझी पुलिस उनके घर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी ली।
ये थी पूरी घटना
एमईएस कॉलोनी सीओडी रोड निवासी सैनिक सुंदर सिंह भाटी के घर के सामने शुक्रवार रात अक्षय कुमार के साथ उसी कॉलोनी निवासी विक्की जैन, शुभम और नंदू विवाद कर रहे थे। सैनिक के परिवार ने रोका, तो तीनों ने उनके साथ भी बदसलूकी की और धमकी दी। इसके पूर्व भी वे विवाद कर चुके थे। पुलिस ने तीनों के खिलाफ धारा 294, 323, 506, 34 भादवि का प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार किया।
पत्रिका व्यू
शर्म तो आपको आई नहीं होगी?
जबलपुर पुलिस! आपका महकमा माने या ना माने, लेकिन यह शर्म की बात है कि सेना के एक जवान को परिवार की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगानी पड़ी। उसके पहले सैनिक के परिवार ने रांझी पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन वहां से मामले को इतने हल्के में लिया गया कि गुंडों-मवालियों का दुस्साहस बढ़ गया। वे परिवार को परेशान करते रहे। यह मामूली बात नहीं है कि स्थानीय पुलिस पर किसी परिवार का भरोसा टूट जाए। उन्हें मजबूरन मुख्यमंत्री को ट्वीट करना पड़ा होगा। यह तो अच्छा हुआ कि परिवार ने हिम्मत दिखाई। वरना, तमाम परिवार ऐसे हैं, जो पुलिस की कार्यप्रणाली से इतना परेशान होते हैं कि अराजक तत्वों से समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं। अच्छी बात है कि मुख्यमंत्री ने तकलीफ सुनी। जवान की कीमत का अहसास पुलिस को भी कराया। जिले के पुलिस प्रमुख को भी सोचना होगा कि आखिर यहां हो क्या रहा है? हत्या, लूट, चोरी की वारदातों पर तर्क दिया जाता है कि पुलिस की भी अपनी सीमाएं हैं। लेकिन, इस बारे में शायद ही जवाब दे पाएं कि देश की सुरक्षा में तैनात जवान का परिवार आपकी निगहबानी में असुरक्षित कैसे महसूस करने लगा? अफसरों को मैदान में उतरकर बताना होगा कि पुलिस लोगों का भरोसा कैसे जीते?