
MP High Court Jabalpur: जबलपुर हाईकोर्ट में भरण-पोषण के आवेदन पर सख्त कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज की। (फोटो सोर्स: जबलपुर हाईकोर्ट FB)
MP High Court: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी में कहा कि पति से अंतरिम भरण-पोषण की मांग करने वाली भोपाल निवासी महिला का आवेदन शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ के उस प्रसंग जैसा है, जिसमें एक पाउंड मांस की मांग की गई थी। जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने कहा कि सवा लाख रुपए मासिक कमाने वाली पत्नी के भरण-पोषण का आवेदन पति से एक पाउंड मांस ऐंठने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य जरूरतमंद जीवनसाथी को सहायता देना है न कि समान आर्थिक स्थिति वाले पक्ष को अतिरिक्त लाभ पहुंचाना। बेंच एक महिला की ओर से फेमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
फेमिली कोर्ट ने तलाक की लम्बित कार्यवाही के दौरान अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च की मांग खारिज कर दी थी। महिला ने दावा किया था कि उसकी आय कम हो गई है, इसलिए उसे आर्थिक सहायता दी जाए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि महिला स्वयं नौकरीपेशा है और उसकी आय एक लाख रुपए प्रतिमाह से अधिक है। कोर्ट ने कहा कि भले ही उसकी वर्तमान वार्षिक आय 14.81 लाख रुपए मानी जाए, तब भी वह 1.25 लाख रुपए प्रतिमाह अर्जित कर रही है और अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि दम्पती की कोई संतान नहीं है। पति-पत्नी की आय में ऐसा कोई बड़ा अंतर नहीं है, जिससे आर्थिक निर्भरता का मामला बनता हो। इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने महिला की याचिका निरस्त करते हुए फेमिली कोर्ट का आदेश बरकरार रखा।
Updated on:
24 Jun 2026 09:14 am
Published on:
24 Jun 2026 09:14 am
