जबलपुर

CBSE 10th result 2018: बिना कोचिंग के ही रचा इतिहास, बताए सफलता के ये खास राज

चेहरों पर बिखरी मुस्कान, आसमां छू लेने की तमन्ना

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आदर्श ने बिना कोचिंग के ही रचा इतिहास

जबलपुर। एकाग्रता, लगन और कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो सफलता भी कदम चूमती है। जबलपुर के छात्र आदर्श ने इस बात को एक बार फिर से चरितार्थ किया है। उन्होंने सीबीएसई 10 वीं की बोर्ड परीक्षा में 95.20 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। खास बात ये है कि उन्होंने यह सफलता बिना कोचिंग क्लास के खुद के बलबूते अर्जित की है। आदर्श ने कहा कि मैंने अपनी कमजोरियों पर फोकस किया और उन्हें दूर करने के लिए जी जान से मेहनत की। छह से 8 घंटे तक शेड्यूल बनाकर पढ़ाई की। यह नतीजा इसी का परिणाम है। हर छात्र इसे अपनाकर सफलता प्राप्त कर सकता है।

कार्डिलाजिस्ट बनने की तमन्ना
इस समय जहां कोचिंग एक शगल बन गया है। इस दौर में भी घर पर पढ़ाई करके आदर्श ने सफलता हासिल करके साथियों को एक अनूठा संदेश भी दिया है। आदर्श कहते हैं कि मन में पक्का संकल्प और उसे पाने के लिए एकाग्रता हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। डीपीएस स्कूल के छात्र आदर्श कॉर्डिलॉजिस्ट बनना चाहते हैं। वे इसकी लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। मध्यम वर्गीय फैमिली को बिलांग करने वाले आदर्श अपनी सफलता का श्रेय वे मम्मी अनीता व पापा सुदामा प्रसाद के मोटिवेशन को देते हैं।

टारगेट पर करें फोकस
सीबीएसई 10 वीं की परीक्षा में 98.2 अंक हासिल करने वाले सिटी टॉपर अनुराग गुप्ता का मानना है कि हर छात्र को अपना एक टारगेट बनाकर उस पर फोकस करना चाहिए। मैंने जो टारगेट बनाया बस उसी के लिए मेहनत की। मम्मी-पापा ने इस पर सपोर्ट किया। आदर्श की तमन्ना डॉक्टर बनने की है। इसी लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने बायो को चुना है। अब वे नीट की प्रिपरेशन पर फोकस करना चाहते हैं। जॉय स्कूल के छात्र अनुराग को परीक्षा में 491 माक्र्स मिले हैं। वे फ्यूचर में कार्डियक डॉक्टर बनना चाहते हैं, ताकि दिल की बीमारी के इलाज का सस्ता रास्ता खोज सकें। अनुराग के पिता सीए और मां हाउसवाइफ हैं।

पढ़ाई का एक शेड्यूल
दसवीं की परीक्षा में सफलता का परचम लहराने वाले छात्रों का मानना है कि पढ़ाई या फिर अन्य किसी कार्य को एक शेड्यूल बनाकर किया जाना चाएि। दसवीं में 97.6 अंक हासिल करने वाले अतिशय ने कहा कि मैंने नाइंथ क्लास के बाद से ही टेंथ में अच्छे माक्र्स लाने के लिए टारगेट फिक्स कर लिया था। फोकस स्टडी के साथ पॉइंट टू पॉइंट के कॉन्सेप्ट पर काफी ध्यान दिया। अब उनका इरदा जेइइ प्रिपरेशन पर फोकस करने का है। 96.6 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्र ऋतिक रोशन , 96.2 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले सृजल जैन, 96.8 प्रतिशत अंक अर्जित करने वाले विवेक प्रकाश और 96 प्रतिशत अंक लाने वाले अनन्या शर्मा समेत अन्य छात्रों का भी यही मानना है कि पक्का संकल्प और उसे पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत ही सफलता का खास राज है।

कमजोरी पर दें ध्यान
अव्वल आयीं ऋषिका केसरवानी, वेदांत कोठिया, रिशा जैन और मिहिर लखानी का मानना है कि हर विद्यार्थी को शुरू से ही उन सब्जेक्ट्स पर फोकस करना चाहिए, जिस पर वे कमजोर हैं। इसके लिए घर पर ही पढ़ाई का एक बेहतर शेड्यूल तय करना चाहिए। वीक पाइंट का बार-बार रिवीजन करना चाहिए। यह कर लें तो दुनिया में कोई भी चीज असंभव नहीं है। टॉपर्स की सूची में आए वेदांग का कहना है कि सफल होना है तो सोशल मीडिया, मोबाइल और टीवी से दूरी बनानी होगी। वेदांग ने कहा कि नाइंथ में मेरे माक्र्स बेहद पुअर से थे। मैंने लक्ष्य पर फोकस किया। मोबाइल, टीवी को बिल्कुल ही भुला दिया। इसी का परिणाम है कि मुझे 96 प्रतिशत से ज्यादा अंक मिले हैं। बस, चाह ले हर छात्र इस टारगेट को अचीव कर सकता है।

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Published on:
29 May 2018 09:06 pm
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