Traffic Stress Syndrome : ट्रैफिक का शोर बना रहा दिमागी तौर पर बीमार, सामने आए ये मामले, लबे समय तक ट्रैफिक में रहने से दिल और सांस से जुड़ी बीमारियों का रिस्क कई गुना तक बढ़ जाता है। कंसंट्रेशन, याददाश्त और फैसले लेने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
Traffic Stress Syndrome :शहर का ट्रैफिक और जगह-जगह लगने वाले जाम से हमारी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। आए दिन जाम में फंसने वालों में ट्रैफिक स्ट्रेस सिंड्रोम देखने को मिल रहा है। इसका असर हमारी मेंटल और फिजिकल दोनों तरह की हेल्थ पर पड़ता है। इसकी वजह से सिर दर्द, थकान, चिंता, डिप्रेशन और हार्ट बीट बढ़ने की बीमारी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार लबे समय तक ट्रैफिक में रहने से दिल और सांस से जुड़ी बीमारियों का रिस्क कई गुना तक बढ़ जाता है। कंसंट्रेशन, याददाश्त और फैसले लेने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार जाम में फंसने पर व्यक्ति का स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता है। इससे उसके अंदर एड्रीनल, नॉर एड्रीनल से दूसरे ग्रोथ हारमोंस का रिसाव होता है। इनसे ब्लड शुगर बढ़ती है। पैंक्रियाज की बीटा सेल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बीटा सेल नष्ट हो जाती है। इससे इंसुलिन का रिसाव प्रभावित होता है और खून में ब्लड शुगर बढ़ जाती है।
●माइग्रेन रोगी के सिर दर्द में तेजी
●ब्लड सर्कुलेशन पर असर
●अस्थमा, सीओपीडी रोगी को अटैक का खतरा
●स्ट्रेस से गैस की परेशानी
●डिप्रेशन के रोगी को घबराहट
विक्टोरिया अस्पताल के एमडी डॉ. संदीप भगत के अनुसार कोविड से संक्रमित हुए लोगों के लिए जाम और भी बड़ा खतरा बन रहा है। उन्होंने बताया कि कोविड से संक्रमित कोई व्यक्ति जाम में फंसता है, तो वाहनों से निकलने वाला धुआं सांसों के जरिए शरीर में जाता है। इससे उसके फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है। कई बार यह गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकता है। बार-बार जाम में फंसने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी हो सकता है।