स्वामी विवेकानंद को हो गया था मौत का पूर्वाभास, किया था यह इशारा

चालीस साल की आयु पूरी नहीं कर पाने का दिया था संकेत, राजा ने दिया था नरेंद्रनाथ को विवेकानंद नाम

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Jan 12, 2017
swami vivekanand performance in english
जबलपुर। स्वामी विवेकानंद को उनकी जयंती पर आज देशभर में याद किया जा रहा है। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था और 4 जुलाई 1902 को वे महासमाधि में लीन हो गए। ये विश्वविख्यात सन्यासी मात्र 39 साल तक जिए पर इतनी कम उम्र में उन्होंने भारत और सनातन धर्म को विश्वभर में पुनर्प्रतिस्ठित कर दिया। स्वामीजी स्वयं कई सिद्धियों के ज्ञाता थे। विशेष बात यह भी है कि उन्हें अपनी मृत्यू का भी पूर्वाभास हो गया था। उनके भाषणों के संकलन की पुस्तक में इस तथ्य का भी उल्लेख किया गया है।


कम उम्र में कर गए काम

विवेकानंद साहित्य का संकलन करने और पढऩे में रुचि रखनेवाले शिक्षाविद संजय नेमा बताते हैं कि स्वामीजी के भाषणों में न केवल उनका ज्ञान उभरकर सामने आता है बल्कि उनकी पारलौकिक शक्तियों से भी साक्षात्कार हो जाता है। स्वामी विवेकानंद यह बात भली-भांति जानते थे कि उनकी आयु बहुत कम है। अपनी मृत्यु का उन्हें पूर्वाभास था और उन्होंने इसका जिक्र भी किया था। स्वामीजी ने एक बार अपने एक भाषण में कहा- भले ही मैं अपने जीवन के 40 वर्ष पूरे न कर सकूं पर मैं लोगो को शिक्षा देता रहूंगा, जब तक मनुष्य अपने देवत्व को प्राप्त न कर ले। गौरतलब है कि स्वामीजी 40 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर सके थे। महज 39 साल की उम्र में इस विश्व विजयी सन्यासी की सांसे थम गई थीं पर वे अपना काम कर चुके थे। अमेरिका में विश्व धर्म संसद का उनका ओजपूर्ण वक्तव्य विश्व विरासत में शामिल हो चुका था।

राजा ने दिया था नाम

कलकत्ता के शिमला मोहल्ले में दत्त परिवार में जन्मे विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। बचपन में घुड़सवारी का बेहद शौक था। वे कम उम्र में ही ध्यान का अभ्यास करने लगे थे। अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस देव से दीक्षा लेकर वे जब भारतभ्रमण पर निकले तो राजस्थान भी पहुंचे। यहां राजा अजीतसिंह उनके शिष्य बन गए। इन्हीं राजा अजीतसिंह ने विवेकवान और गोल-हँसमुख चेहरे को देखते हुए उनको विवेकानंद नाम दिया था। स्वामी विवेकानंद का यह वाक्य जगत-प्रसिद्ध है- उठो! जागो! रुको नहीं, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो।
Published on:
12 Jan 2017 02:02 pm
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