
जबलपुर। घरों में अनुपयोगी कुओं, पुराने नलकूप या आंगन में सोकपिट बनाकर बारिश का लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहने से बचाया जा सकता है। जानकारों के अनुसार इसके लिए बहुत बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। थोड़े से प्रयास से पांच से पंद्रह हजार रुपए खर्च कर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जा सकता है। छत का आकार बउ़ा होने पर सोकपिट बनाना होताह है। विशेषज्ञों के अनुसार इसमें 20-25 हजार रुपए खर्च आता है।
इन्होंने सुझाए उपाए
भूजलविद् विनोद दुबे के अनुसार सोकपिट, पुराने कुओं, नलकूप उपयोग कर छतों का पानी भ-ूगर्भ में पहुंचाया जा सकता है। इंजीनियर के मार्गदर्शन में किसी एक मॉडल को अपनाकर वारिश के जल को व्यर्थ बहने से रोका जा सकता है। इस प्रकार से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करने में पांच से पंद्रह हजार तक खर्च आता है। छत का आकार बड़ा होने पर खर्च बढ़ जाता है।
अपना सकते हैं ये मॉडल
मॉडल : 01 - आंगन में चार से पांच फीट गहरा गड्ढा खोदकर इंजीनियर के मार्गदर्शन में चारों ओर कांक्रीट की वॉल बनाएं। गड्ढे को रेत की बजरी, गिट्टी से भर दें। छत से सोकपिट तक पाइप लगाएं। पाइप के मुहाने पर जाली जरूर लगाएं। जानकारों के अनुसार इस मॉडल पर लगभग दस हजार रुपए खर्च आएगा।
मॉडल : 02 - बरमा के जरिए 20-25 फीट गहरा हाथ बोर कराएं। छत से बोर तक पाइप जोड़ दें। पाइप के मुहाने पर जाली जरूर लगाएं। जानकारों के अनसार इस मॉडल से बारिश का पानी सीधे भू-गर्भ में पहुंचाया जा सकता है। इस प्रकार से वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करने में 15 रुपए का खर्च आता है। जरूरत पडऩे पर बोर वेल का उपयोग पानी निकालने के लिए भी किया जा सकता है।
मॉडल : 03 - घरों में पहले से मौजूद अनुपयोगी बोरवेल या कुएं का भी वाटर हार्वेस्टिंग के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए छत से सम्बंधित कुएं या बोरवेल तक पाइप लगाना पड़ेगा। इंजीनियरों के अनुसार इस मॉडल पर महज चार-पांच हजार रुपए का खर्चा आता है। इसके जरिए पुराने जल स्रोत को पुनर्जीवित भी किया जा सकता है।