जबलपुर

weather report: भट्ठी सा तप रहा शहर, 42 डिग्री पहुंचा तापमान

भट्ठी सा तप रहा शहर,

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May 12, 2018
weather report

जबलपुर. शहर इन दिनों भट्ठी की तरह तप रहा है। गर्मी से लोग बेहाल हैं। हालांकि, ज्यादा तापमान के बीच भी शहर के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां तापमान में 0.5 से लेकर एक डिग्री सेल्सियस तक का अंतर है। शहर के चार अलग-अलग क्षेत्रों के तापमान का आंकलन करने से अंतर सामने आया।

about- यहां आग उगल रहा सूरज, हरियाली वाले क्षेत्रों में मिल रही कुछ राहत

एक किमी में ही अंतर
मौसम विज्ञान कंद्र अधारताल से जवाहर लाल कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान कंद्र की दूरी एक किमी है। अधारताल क्षेत्र में हरियली कम है और हर तरफ कॉन्क्रीट के जंगल हैं। दोपहर 12 बजे यहां मौसम केंद्र में अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, गया तो कृषि विश्वविद्यालय में तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस था। वहीं डुमना एयरपोर्ट पर भी तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस कम था।

शहर में ये हैं हीट जोन
हीट जोन का पहला डेंजर क्षेत्र
राइट टाउन, नेपियर टाउन, फुहारा, कोतवाली, घमापुर, ओमती
कारण—बेतरतीब और सटाकर बहुमंजिला भवनों का निर्माण
- सूर्य की रोशनी अवशोषित होने के लिए न खुली जगह है और न पेड़-पौधे
- कॉन्क्रीट, डामर की सड़कें, फुटपाथ तक कॉन्क्रीट के बने हैं
- एसी-कूलर का ज्यादा इस्तेमाल।

हीट जोन का दूसरा डेंजर क्षेत्र
धनवंतरी नगर, विजय नगर, माढ़ोताल, अधारताल, तिलहरी, बिलहरी
कारण- कृषि भूमि एरिया सिमटने की वजह-बिल्डरों ने बड़ी संख्या में यहां बहुमंजिला भवनों का निर्माण
- पेड़ों को काटा गया, नए पौधे तुलनात्मक रूप से कम लगाए गए
- यहां आधा दर्जन तालाबों को पूर कर कॉलोनियां बसा दी गईं।

हीट जोन का तीसरा डेंजर क्षेत्र
ग्वारीघाट, गोरखपुर, रसल चौक, हाथीताल, मदनमहल, गुप्तेश्वर, शक्तिनगर, गढ़ा
कारण- -पहाड़ी और आसपास के पौधे काटकर कॉलोनियां बसायी गईं
- मदन महल पहाड़ी की हरियाली कम होने के चलते तापमान बढ़ा
- मकानों के बीच में कम अंतराल होने की वजह से सरफेस एरिया बढ़ता जा रहा।

कहते हैं विशेषज्ञ
रानी दुर्गावती विवि के भूगोल विभाग के प्रोफेसर लोकेश श्रीवास्तव के अनुसार जबलपुर पत्थरों पर बसा है। मई जून में कर्क रेखा के दोनों ओर सूरज की किरणें सीधी पड़ती है, इस कारण चट्टानें और इमारतें जल्दी गर्म हो जाती हैं। २२ जून से सूरज दक्षिणायन होंगे, तो ये किरणें फिर तिरछी पड़ेंगी।

बहुमंजिला भवनों से सूरज की किरणें रिफलेक्ट होकर और हीट बढ़ाती हैं। जबकि, आसपास जल, पौधे, खले क्षेत्र और कृषि भूमि इसे आब्जर्व कर लेती हैं।
- आर के दत्ता, वैज्ञानिक सहायक

सघनता से बने पक्के मकान और वाहन के धुंएे आसमान में एक लेयर बना देते हैं, जिससे शहरों में अधिक गर्मी महसूस हो रही है। पेड़ों के कटने से प्राकृतिक सिस्टम बिगड़ गया है।
- प्रो. एएन सिंह, भू-वैज्ञानिक

धूप से बेहाल रहे लोग
तेज धूप के साथ ही गर्म हवाओं के थपेड़ों ने शुक्रवार को लोगों को हलाकान कर दिया। मौसम विभाग के अनुसार तापमान में फिलहाल स्थिरता का दौर है। अधिकतम तापमान शुक्रवार को अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री अधिक ४२.७ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि, २७ अप्रैल को अधिकतम तापमान ४२.८ डिग्री सेल्सियस था। न्यूनतम तापमान २५ डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह की आद्र्रता २४ और शाम की आद्र्रता १३ प्रतिशत रही।

क्या है हीट जोन
शहर में बेतरतीब और सटाकर बनते घरों व ऊंची-ऊंची इमारतों के कारण सरफेस एरिया बढ़ जाता है। इसके कारण गर्मी तेजी से बढ़ती है। इसे ही अरबन हीट आईलैण्ड इफेक्ट (हीट जोन) के तौर पर जाना जाता है। यहां का तापमान तुलनात्मक रूप से तीन से चार डिग्री तक अधिक रहती है।

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Published on:
12 May 2018 03:00 pm
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