जगदलपुर

CG News: 2025 में खुलेंगे 40 नए कैंप, नक्सलियों की घेराबंदी का मास्टर प्लान तैयार

CG News: अबूझमाड़ को नक्सल मुक्त करना जरूरी है फोर्स ने इस बाबत अपनी स्ट्रैटजी भी बदली है। नए वर्ष का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है जिसमें अबूझमाड़ पर ज्यादा फोकस होगा इस दौरान यहां फोर्स के 40 नए कैंप खोले जाएंगे।

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Dec 30, 2024
CG News

CG News: बस्तर को नक्सल मुक्त करने की दिशा में साल 2024 काफी कारगर साबित हुआ है। इस साल बस्तर में 250 से ज्यादा नक्सली अलग-अलग मुठभेड़ में मारे गए हैं। जिनमें 120 से अधिक नक्सली माड़ में ही मारे गए हैं। अबूझमाड़ के थुलथुली के जंगलों में इस वर्ष अब तक की सबसे बड़ी मुठभेड़ हुई थी जिसमें 38 नक्सली ढेर हुए थे।

अबूझमाड़ का क्षेत्र काफी बड़ा है यहां की भौगोलिक परिस्थितियां नक्सलियों के काफी अनुकूल है यही कारण है कि अबूझमाड़ को नक्सलियों की अघोषित राजधानी माना जाता है। पुलिस अफसरों का मानना है कि बस्तर में संपूर्ण शांति का मार्ग अबूझमाड़ होकर ही निकलेगा इसलिए अबूझमाड़ को नक्सल मुक्त करना जरूरी है फोर्स ने इस बाबत अपनी स्ट्रैटजी भी बदली है। नए वर्ष का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है जिसमें अबूझमाड़ पर ज्यादा फोकस होगा इस दौरान यहां फोर्स के 40 नए कैंप खोले जाएंगे, इसके लिए केंद्रीय अर्ध सैनिकों की दो अतिरिक्त बटालियन भी मिलेंगी।

सूत्र बताते हैं कि इसी महीने जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर में नक्सल ऑपरेशन से जुड़ी अहम बैठक ली तो उसमें तय किया गया कि जनवरी से ही फोर्स अबूझमाड़ को घेरना शुरू करेगी। बड़े नक्सल लीडर की मौजूदगी यहां अब भी है और उन्हें टारगेट किया जाएगा।

साढ़े चार हजार वर्ग किमी के माड़ में छिपे हैं दुर्दांत नक्सली

साढ़े चार हजार वर्ग किमी के क्षेत्र में फैले अबूझमाड़ में दुर्दांत नक्सली अभी भी छिपे हुए हैं। बताया जाता है थुलथुली मुठभेड़ में नीति के ढेर होने के बाद यहां पर सेंट्रल कमेटी के पूर्व सचिव गणपति, मोपल्ल राजू, बसव राजू और सेंट्रल कमेटी मेंबर सोनू दादा की मौजूदगी है। फोर्स को समय-समय पर इनकी मौजूदगी के इनपुट मिलते रहते हैं अब सटीक सूचना के आधार पर इन बड़े लीडर पर प्रहार की योजना पर काम किया जा रहा है। 2024 में हुई मुठभेड़ में जहां नक्सलियों की सबसे खतरनाक कंपनी नंबर 1 और 2 का सफाया किया गया तो अब निशाने पर माड़ एरिया डिवीजन कमेटी के नक्सली हैं।

अबूझमाड़ को नक्सलमुक्त करना इसलिए अहम

बस्तर में मैदानी इलाके की घेराबंदी का काम 2024 में लगभग पूरा हो चुका है। अब वक्त अबूझमाड़ के घनघोर जंगलों को घेरने का है। अबूझमाड़ इसलिए भी अहम है क्योंकि यह नक्सलियों का सबसे सुरक्षित इलाका है। नक्सली इसे अपनी राजधानी बताते रहे हैं। आज तक माड़ का जमीनी सर्वे नहीं हुआ है। यहां के गांवों में आज तक मुलभूत सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। बस्तर के बाकी इलाकों की तुलना में सबसे चुनौतीपूर्ण इलाका अबूझमाड़ ही है। फोर्स अगर 2025 में माड़ को फतेह कर लेती है 70 फीसदी सफाया बस्तर से हो जाएगा।

अबूझमाड़ में ही हैं नक्सलियों के बड़े ट्रेनिंग कैंप

नक्सलियों के बड़े ट्रेनिंग कैंप अबूझमाड़ में ही ऑपरेट होते रहे हैं। गुरिल्ला वॉरफेयर की ट्रेनिंग यहीं पर नक्सलियों के नए लड़ाकों को दी जाती है। बताया जा रहा है कि लगातार कमजोर होते नक्सली अब बस्तर में नए सिरे से भर्ती का प्रयास कर रहे हैं अगर वे ऐसा करते हैं तो उन्हें ट्रेनिंग के लिए अबूझमाड़ की जरूरत होगी। यही कारण है कि माड़ को अपने कब्जे में जल्द से जल्द लेना चाहती है।

नए साल की नई स्ट्रेटजी, बड़े अफसर जंगल में कैंप करेंगे

बताया जा रहा है कि नए साल में माड़ को भेदने के लिए फोर्स ने जो नई स्ट्रेटजी तय की है उसके तहत सुरक्षा बलों के बड़े अफसर जंगलों में कैैप करेंगे। वे बड़े ऑपरेशनों को अब सीधे लीड करेंगे। छत्तीसगढ़ पुलिस के भी एएसपी और डीएसपी रैंक के अधिकारियों को भी अब जंगल में नक्सल ऑपरेशन में भेजा जाएगा।

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Updated on:
30 Dec 2024 07:56 am
Published on:
30 Dec 2024 07:55 am
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