कांग्रेस के असंतुष्टों पर भाजपाइयों द्वारा डोरे डालने की खबर से मची खलबली, संगठन ने कहा सीएम को धन्यवाद प्रेषित करने जा रहे कांग्रेसी।
जगदलपुर. छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव के मतगणना के बाद महापौर पद के लिए लड़ाई शुरू हो गई है। भाजपा के महापौर और सभापति के चुनाव में प्रत्याशी खड़ा करने के ऐलान से कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई है। बताया जाता है कि भाजपा ने कांग्रेस के अंदरूनी असंतोष का लाभ उठाने कुछ कांग्रेसी पार्षदों का मन टटोलने की कोशिश शुरू कर दी है। भाजपा के एक कद्दावर महिला नेत्री और उनके समर्थकों की इस मुहिम को भाजपा संगठन का समर्थन प्राप्त है। भाजपा के इस कवायद को देखते हुए कांग्रेस के रणनीतिकारों के कान खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की गोपनीय बैठक में इस बात पर चर्चा भी हुई। इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने सभी पार्षदों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें शहर से बाहर भेजने का निर्णय लिया। शनिवार की शाम 4 बजे उन्हें विधायक कार्यालय बुलाकर उन्हें रायपुर जाने का फरमान सुनाया। जिसके बाद अधिकांश पार्षद राजधानी रवाना हो चुके हैं। जो इक्का दुक्का बचे हैं वे रायपुर जाने की तैयारी में लगे हैं।
भाजपा को समर्थन न मिला तो बागी पर खेल सकते हैं दांव
निगम चुनाव में कांग्रेस के खाते में 28 पार्षद आए हैं वहीं भाजपा को 19 पार्षदों से संतोष करना पड़ा है। बहुमत के लिए 25 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत प्राप्त होने के बाद भी पदों को लेकर असंतोष सुनाई दे रहा है। महापौर पद अनारक्षित महिला होने के कारण सभी महिला पार्षद इस पद के लिए दावेदार हो सकती हैं। कांग्रेस में दावेदारों की संख्या अधिक होने से कांग्रेस के रणनीतिकार भी आशंकाग्रस्त हैं यदि सहमति नहीं हो पाई तो बगावत की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। भाजपा की रणनीति तो पहले कांग्रेस की फूट का लाभ उठाकर अपने पक्ष में संभावनाएं तलाशना है। यदि यह संभव नहींं हुआ तो कांग्रेस में फूट डालकर बागी गुट तैयार करना और फिर उसे समर्थन देकर कांग्रेस को शहरी सत्ता दूर रखना है। इसके लिए भाजपा सभी पैंतरे आजमा रही है। हालांकि जब पत्रिका ने इस बारे में कांग्रेस के जिला संगठन से बात की तो उनका कहना है कि वे सभी सीएम को धन्यवाद ज्ञापित करने जा रहे हैं। भाजपा से खरीद-फरोख्त का डर जैसी कोई बात नहीं है।
कोई बस तो कोई निजी वाहन में निकला
राजधानी जाने का आदेश जिला संगठन ने पार्षदों को तो सुना दिया लेकिन उनके लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई। जिसके पास निजी वाहन है वह अपने पहचान वाले पार्षदों को अपने साथ गाड़ी में लेकर चल दिए। लेकिन कुछ पार्षद ऐसे भी थे जिनका कोई पहचान नहीं था। वे जिला संगठन का आदेश मानते हुए बस की टिकट कटाकर राजधानी के लिए रवाना हुए। अब ऐसे पार्षदों का रायपुर में जाकर संगठन व साथी पार्षद कितनी मदद करेंगे।
जिपं चुनाव में भी हो चुकी है क्रॉस वोटिंग
कांग्रेस को यह डर ऐसे ही नहीं सता रहा है। इसी तरह बहुमत होने के बाद भी पिछले बार हुए जिला पंचायत चुनाव में कांग्रेस के हाथ हार लगी थी। जिपं अध्यक्ष में लिए हुए मतदान में क्रॉस वोटिंग की वजह से कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। यही वजह है कि कांग्रेस इस बार कोई भी गलती नहीं करना चाहती। इसलिए उसने सभी पार्षदों को रायपुर भेजना ही उचित समझा।
एक मात्र निर्दलीय भी कांग्रेसियों के साथ
गंगानगर वार्ड नंबर 23 से कांग्रेस से बागी हुए निर्दलीय पार्षद राजेश राय के भी रायपुर जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि जिला संगठन से राजेश राय ने खुद बात की और उसने महापौर और अध्यक्ष पद के लिए होने वाले मतदान में कांग्रेस के पक्ष में मत करने की बात कही थी। इसे देखते हुए शनिवार को उन्हें भी जिला संगठन ने रायपुर जाने के निर्देश दिए थे। वे कांग्रेसी पार्षदों के साथ निजी वाहन में रायपुर के लिए रवाना हुए।
राजधानी में तय होगा कांग्रेस के महापौर पद के प्रत्याशी का नाम
इधर पीठासीन अधिकारी के 4 जनवरी के महापौर और सभापति के चुनाव के लिए सम्मेलन की तिथि घोषित करने के बाद कांग्रेस संगठन ने कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार को जिला संगठन पार्टी की स्थापना दिवस मनाने के बाद कांग्रेस भवन में पदाधिकारियों के साथ बैठकों का दौर चलता रहा। एकराय बनाने दिनभर कांग्रेसी रायशुमारी में जुटे रहे। अब राजधानी जाने के बाद महापौर और सभापति का नाम फाइनल राजधानी में प्रदेश संगठन ही तय करेगा।
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