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ऐतिहासिक आयोजन: गांव की 580 ‘लाडलियों’ का सम्मान, आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय

Historic Celebration: 580 Daughters Honoured in a Grand Village Ceremony, Becomes Talk of the Region...​580 बेटियों और भुआओं का हुआ सम्मान ​इस गरिमामय कार्यक्रम में गाँव में जन्मीं और ब्याही गईं कुल 580 बहनों, बेटियों और भुआओं को आमंत्रित किया गया था। आयोजन के दौरान सभी का तिलक लगाकर और उपहार भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। अपनी ही जन्मस्थली पर इस तरह का मान-सम्मान पाकर कई बहनों की आँखें नम हो गईं।

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Historic Celebration: 580 Daughters Honoured in a Grand Village Ceremony, Becomes Talk of the Region​

जगदलपुर। श्रद्धा, संस्कृति और स्नेह के संगम के साथ बामनवाली गाँव ने एक ऐसी मिसाल कायम की है जिसकी गूँज अब पूरे क्षेत्र में सुनाई दे रही है। स्व खेताराम जी व स्व गोमतीदेवी सारस्वा की स्मृति मे उनके पुत्रों तोलाराम, बीरूराम व भवानीशंकर सारस्वा द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहूति के शुभ अवसर पर आयोजित 'बहन-बेटी सम्मेलन' के दूसरे दिन एक भव्य 'बहन-बेटी सम्मान समारोह' का आयोजन किया गया।

​580 बेटियों और भुआओं का हुआ सम्मान
​इस गरिमामय कार्यक्रम में गाँव में जन्मीं और ब्याही गईं कुल 580 बहनों, बेटियों और भुआओं को आमंत्रित किया गया था। आयोजन के दौरान सभी का तिलक लगाकर और उपहार भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। अपनी ही जन्मस्थली पर इस तरह का मान-सम्मान पाकर कई बहनों की आँखें नम हो गईं।



आयोजन की मुख्य विशेषताएँ

  • ​सामूहिक स्नेह: गाँव की बुजुर्ग भुआओं से लेकर नन्हीं बेटियों तक, सभी को एक मंच पर सम्मानित किया गया।
  • ​सांस्कृतिक विरासत: यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि हमारी गौरवशाली परंपराओं को जीवंत रखने का एक प्रयास भी रहा।
  • ​क्षेत्र में चर्चा: बामनवाली के इस कदम की सराहना आसपास के सैकड़ों गाँवों में हो रही है। लोग इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक एकता की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं।

ईको भारत संस्थापक व मुख्य आयोजक सम्पत सारस्वत बामनवाली ने कहा कि "बेटी सिर्फ एक घर की नहीं, बल्कि पूरे गाँव की शान होती है। इस आयोजन का उद्देश्य अपनी जड़ों से जुड़ी इन बेटियों को यह अहसास कराना था कि उनके मायके में उनका स्थान सदैव सर्वोपरि है।"

​भक्ति और सम्मान का संगम
​श्रीमद्भागवत कथा के आध्यात्मिक वातावरण के बाद इस सामाजिक समारोह ने गाँव में उत्सव जैसा माहौल बना दिया। लोगो ने बामनवाली गांव की तुलना वृंदावन से करते हुए बताया कि 20 वर्ष से 95 वर्ष तक की बेटियों ने आयोजन की दिल खोलकर प्रसंशा की, उपस्थित जनसमूह ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और रिश्तों की अहमियत समझने का मौका मिलता है।

​बामनवाली गाँव द्वारा किया गया यह सम्मान समारोह अब अन्य गाँवों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

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