
कानपुर में 29 साल तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है।बिरहाना रोड के एक इंटर कॉलेज, में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने खुद को मृत कर्मचारी का पुत्र बताकर न सिर्फ नौकरी हासिल की, बल्कि करीब तीन दशक तक वेतन भी उठाता रहा। मामले का खुलासा शिक्षक नेता की शिकायत के बाद हुई जांच में हुआ।
मृतक के परिवार ने जताई थी आपत्ति -
बताया गया कि मूल रूप से अयोध्या निवासी शिवबहादुर ने वर्ष 1996 में कॉलेज के कर्मचारी रंग बहादुर यादव की मृत्यु के बाद खुद को उनका पुत्र दर्शाते हुए मृतक आश्रित कोटे में नौकरी प्राप्त की थी। जांच में सामने आया कि आठवीं की टीसी में उसके पिता का नाम रामपाल दर्ज था, जबकि नौवीं में प्रवेश के समय पिता का नाम बदलकर रंग बहादुर करा दिया गया। इसी आधार पर उसने नौकरी हासिल कर ली। जब कि रंग बहादुर के परिजनों ने इस फर्जीवाड़े के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। निचली अदालत में फैसला उनके पक्ष में आया,लेकिन मामला अपर जिला न्यायालय और हाईकोर्ट में लंबित रहने के दौरान आरोपी नौकरी करता रहा और वेतन लेता रहा।
शिक्षक नेता ने दर्ज कराई थी शिकायत -
20 सितंबर 2025 को उन्नाव के एक शिक्षक नेता ने आईजीआरएस पोर्टल पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें संबंधित प्रकरण की जांच की मांग की गई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 26 सितंबर 2025 को सह जिला विद्यालय निरीक्षक प्रशांत द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। समिति को पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समयावधि में जांच पूरी करते हुए समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. संतोष कुमार राय को सौंप दी थी।
वेतन रिकवरी कराई जाएगी -
जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि आरोपी अपने पक्ष में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच रिपोर्ट के आधार पर उसे तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के आदेश प्रधानाचार्य को जारी कर दिए गए हैं। साथ ही 29 वर्षों में प्राप्त वेतन की रिकवरी की भी कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
3 Mar 2026, 11:27 AM IST
Published on:
3 Mar 2026, 11:27 AM IST
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