
कानपुर। औषधि की आड़ में एनडीपीएस श्रेणी के कोडीनयुक्त सीरप और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार का खुलासा होने के बाद एसआईटी ने गिरोह के सरगना विनोद अग्रवाल और उसके परिवार पर शिकंजा कस दिया है। जेल में बंद विनोद अग्रवाल, उसकी पत्नी सविता और फरार बेटे शिवम के नाम की करीब 9.50 करोड़ रुपये की पांच संपत्तियां फ्रीज कर दी गई हैं। इसके साथ ही 23 लाख रुपये कीमत की इनोवा क्रिस्टा कार और छह बैंक खातों में मिले 42 लाख रुपये भी सील कर दिए गए हैं।
एक लाख शीशी कोडीनयुक्त सीरप हुई थीं बरामद -
डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की छापेमारी में एक लाख शीशी कोडीनयुक्त सीरप बरामद हुई थीं। जांच में सामने आया कि करीब 20 लाख शीशियां बेची जा चुकी थीं, जिनमें से 11.50 लाख शीशियां पुलिस पहले ही बरामद कर चुकी है। गिरोह का सरगना फीलखाना के पटकापुर निवासी विनोद अग्रवाल है, जिसे 25 जनवरी को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल स्थित दाद की कोठी, आजाद चौक से गिरफ्तार कर 26 जनवरी को जेल भेजा गया था।जांच में यह भी पता चला कि विनोद ने दो वर्षों में यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की आठ फर्मों से माल खरीदा था।
इन संपत्तियों पर की गई कार्रवाई -
डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि सर्किल रेट के मुकाबले बाजार मूल्य लगभग दोगुना आंका जाता है, इसी आधार पर संपत्तियों की कीमत बढ़कर 9.50 करोड़ रुपये मानी गई है। चिह्नित संपत्तियों में सिविल लाइंस के गोपाल विहार में दो प्लॉट, जाजमऊ स्थित एमराल्ड गुलिस्तां में एक संपत्ति, बिरहाना रोड पर पत्नी के नाम भवन और दहेली सुजानपुर के रामपुर में शिवम के नाम एक प्लॉट शामिल है।
गौरतलब है कि 12 फरवरी को वाराणसी पुलिस भी इन्हीं पांच संपत्तियों को करीब 4.80 करोड़ रुपये आंकते हुए फ्रीज कर चुकी थी। वहां विनोद की फर्म के बैंक खाते में मिले 37,42,995 रुपये भी सील किए गए थे। अब एसआईटी की कार्रवाई के बाद गिरोह की आर्थिक कमर तोड़ने की दिशा में बड़ी पहल मानी जा रही है।
Published on:
27 Feb 2026 01:55 pm
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