
नगर निगम का अनोखा कार्यक्रम (photo source- Patrika)
Dog sterilization campaign: नगर निगम आवारा कुत्तों का कितना सम्मान करता है इसका एक उदाहरण रविवार को तब सामने आया जब महापौर संजय पांडेय कंगोली के नसबंदी सेंटर में कुत्तों की पूजा करने बैठ गए। इसके बाद शहर में इस पूजा का वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। कार्यक्रम को लेकर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रिया सामने आने लगी। सोशल मीडिया पर लोग लिखने लगे कि जगदलपुर नगर निगम प्रदेश का पहला डॉग लवर निगम है।
इस तरह से इस कार्यक्रम को लेकर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़ी शिकायतों के बीच रविवार को नगर निगम का यह अनोखा अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। आमतौर पर सरकारी योजनाओं की शुरुआत फीता काटकर या दीप प्रज्वलित कर होती है, लेकिन इस बार नगर निगम ने आवारा श्वानों के लिए शुरू किए गए एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर का शुभारंभ कुत्तों की पूजा कर किया।
महापौर संजय पांडेय, एमआईसी सदस्य, पार्षद और निगम अधिकारियों ने श्वानों को तिलक लगाया, दूध पिलाया और डॉग फुड खिलाकर अभियान की शुरुआत की। इसके बाद उनकी नसबंदी शुरू की गई। महाराणा प्रताप वार्ड स्थित एसएलआरएम डोंगरी सेंटर के पास आयोजित इस कार्यक्रम को देखने बड़ी संख्या में लोग जुटे। किसी ने इसे पशु प्रेम का संदेश बताया तो किसी ने कहा कि पहली बार किसी सरकारी अभियान की शुरुआत इतने अलग अंदाज में देखी गई। सोशल मीडिया पर भी कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होते रहे।
दरअसल, शहर में लंबे समय से आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या, रात के समय झुंड में घूमने, लोगों पर हमला करने और रेबीज जैसी बीमारियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए महापौर संजय पांडेय ने पशु प्रेमी संस्थाओं और निगम अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा तैयार करवाई। इसके बाद नगर निगम, पशु चिकित्सा विभाग और पशु प्रेमियों की संयुक्त निगरानी समिति बनाई गई, जो पूरे अभियान पर नजर रखेगी।
नगर निगम ने अभियान के तहत हर महीने करीब 500 आवारा श्वानों के बधियाकरण का लक्ष्य तय किया है। आने वाले समय में शहर के अलग-अलग वार्डों में चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जाएगा। निगम अधिकारियों के अनुसार इससे आने वाले वर्षों में आवारा श्वानों की संख्या नियंत्रित होगी और शहर में लोगों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार किया जा सकेगा। अभियान के दौरान निकाले गए जैविक अवशेषों का भी वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन किया जाएगा। इसके लिए पशु चिकित्सा विभाग की निगरानी में अलग व्यवस्था बनाई गई है।
महापौर संजय पांडेय ने कहा कि यह अभियान केवल श्वानों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नहीं, बल्कि शहर को रेबीज और श्वान जनित समस्याओं से सुरक्षित बनाने के लिए शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि ’’पशु प्रेम और जन सुरक्षा दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।
नगर निगम ने फिलहाल धरमपुरा क्षेत्र से पकड़े गए 22 आवारा श्वानों को एबीसी सेंटर में रखा है। यहां स्नेह एनीमल वेलफेयर सोसायटी के डॉ. विवेक सांगवान, डॉ. विनीत यादव और उनकी टीम द्वारा श्वानों की देखभाल की जा रही है। सबसे पहले उन्हें प्री-केयर केनल में रखा गया है, जहां स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। इसके बाद उनका बधियाकरण, डी-वार्मिंग और रेबीज टीकाकरण किया जाएगा।
ऑपरेशन के बाद श्वानों को तीन दिन तक पोस्ट-ऑपरेशन केयर में रखा जाएगा, ताकि वे पूरी तरह स्वस्थ हो सकें। स्वास्थ्य लाभ मिलने के बाद उन्हें उसी स्थान पर छोड़ा जाएगा, जहां से पकड़ा गया था। निगम का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक और पशु क्रूरता मुक्त होगी।
Published on:
11 May 2026 11:29 am
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