CG PDS Scam: बस्तर में पीडीएस चावल की हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। राशन विक्रेता संघ ने वेयरहाउस कर्मचारियों पर हर बोरी से चावल निकालने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।
CG PDS Scam: बस्तर जिला मुख्यालय स्थित छत्तीसगढ़ स्टेट वेयरहाउसिंग और सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के गोदामों में गरीबों के हक के पीडीएस चावल के साथ बड़े पैमाने पर हेरा-फेरी और चोरी का गंभीर आरोप पीडीएस राशन विक्रेताओं ने लगाया है। इसकी कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए जांच की मांग की है।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी हर बोरी से 2 से 3 किलो चावल निकालते हैं और वजन बराबर करने के लिए शाम को बचे चावल पर पानी छिड़कते हैं। यह सब बगैर अधिकारियों और जिम्मेदारों के संरक्षण के संभव नहीं हो सकता।
राशन विक्रेता संघ ने आरोप लगाया है कि यह हेरा-फेरी गरीबों के राशन और सरकारी निधियों के साथ सीधे खिलवाड़ है। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत इस मामले की गंभीर जांच करनी चाहिए, ताकि दोषियों को दंडित किया जा सके और भविष्य में गरीबों के अधिकार सुरक्षित रहें।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के भ्रष्टाचार की जांच में गोदाम में रखे रिकॉर्ड, धर्मकांटा और सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। वहीं, कलेक्टर कार्यालय ने शिकायत प्राप्त करने की पुष्टि की है और प्रारंभिक तौर पर मामले की सख्त जांच का आदेश दिया गया है।
प्रत्येक चावल की बोरी में राशन की चोरी होने से राशन विक्रेताओं को काफी नुकसान होता है। बोरियों में उपभोक्ताओं की मांग अनुसार चावल प्रदाय करना होता है, परंतु चावल की कमी होने विक्रेताओं को इसकी भरपाई करनी पड़ती है। गरीबों के हक के चावल पर वेयर हाऊस में लंबे समय ये यह खेल चल रहा है।
यह मामला न केवल गरीबों के हक की लड़ाई है, बल्कि सरकारी प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार की चेतावनी भी है। बस्तर जिले में अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि किस तरह यह घोटाला उजागर किया जाएगा और दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाएगा।
यह पूरा खेल गोदाम में धर्मकांटा की सेटिंग बदलकर और सीसीटीवी फुटेज बंद रखकर अंजाम दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार, सुबह 9 से 11 बजे के बीच, जब हेरा-फेरी का सामान बाहर जाता है, इस प्रक्रिया में कोई न कोई साजिश छुपी रहती है। शिकायत में कुछ वीडियो फुटेज भी शामिल किए गए हैं, जो इस काले खेल की पुष्टि कर सकते हैं।
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी कर्मचारी, जो मात्र 10 हजार रुपए मासिक वेतन पाता है, उसके पास लग्जरी कार, आलीशान मकान और सुकमा जिले में पत्नी के नाम पर बड़ा व्यावसायिक परिसर है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह घोटाला वर्षों से चल रहा है और करोड़ों रुपए का खेल हो सकता है।