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PSC की तैयारी के बीच YouTube बना गुरु, हुनर सीख गांव की युवती कमा रही हजारों रुपये, जानें सफलता की कहानी

Village Girl Startup Story: पीएससी की तैयारी के दौरान लगातार असफलताओं और बेरोजगारी के दबाव के बीच जहां कई युवा उम्मीद छोड़ देते हैं, वहीं बस्तर के एक छोटे से गांव की युवती योगिता नागेश ने हार मानने के बजाय अपने हुनर को ही नई पहचान बना लिया।

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Self Employment Success Story

योगिता का काम औरों के लिए बन रहा प्रेरणा (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Self Employment Success Story: पीएससी व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कोशिशों के बावजूद जब सफलता हाथ नहीं लगी, तब रायकोट गांव की योगिता नागेश ने निराशा में डूबने के बजाय अपने हुनर को ही उम्मीद का रास्ता बना लिया। कभी सरकारी नौकरी का सपना लेकर पीएससी की तैयारी करने वाली यह युवती आज ऊन और क्राफ्ट से बने आकर्षक सजावटी सामान तैयार कर आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रही है।

PSC में नहीं मिली सफलता, फिर यूट्यूब से सीखा हुनर

तोकापाल ब्लॉक के रायकोट गांव की रहने वाली योगिता का छोटा सा स्टॉल इन दिनों दंतेश्वरी मंदिर के सामने लोगों का ध्यान खींच रहा है। यहां ऊन से बने रंग-बिरंगे बुके, की-ङ्क्षरग्स, हेयर बैंड, फ्लावर पॉट और महिलाओं की सजावट से जुड़े कई हस्तनिर्मित सामान बिक्री के लिए रखे जाते हैं। हर सामान में उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी साफ दिखाई देती है।

योगिता ने जगदलपुर पीजी कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद गर्ल्स कॉलेज से पॉलिटेक्निक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दो वर्षों तक पीएससी परीक्षा की तैयारी की और तीन बार परीक्षा भी दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। लगातार असफलताओं और बेरोजगारी के दबाव के बीच उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया।

योगिता की कहानी में निराशा छोड़ खुद को साबित करने की प्रेरणा

योगिता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल होने के बाद उम्मीद छोड़ देते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि मेहनत, आत्मविश्वास और सीखने की इच्छा हो तो छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन सकता है।

यूट्यूब वीडियो से से सीखा खास हुनर

योगिता बताती हैं कि शुरुआत में समय बिताने के लिए यूट्यूब वीडियो देखकर ऊन और क्राफ्ट का काम सीखना शुरू किया था। धीरे-धीरे यही शौक रोजगार में बदल गया। बिना किसी प्रशिक्षण के उन्होंने अपने दम पर डिजाइन बनाना सीखा और आज उसी हुनर से हर महीने 4 से 5 हजार रुपए तक की आमदनी कर रही हैं।

अब छोटे से काम को बड़ा बनाने का सपना

योगिता के पिता रघुनाथ नागेश ऑटो पार्ट्स का काम करते हैं। सीमित आय वाले परिवार ने भी बेटी के इस प्रयास में पूरा साथ दिया। योगिता की माता भी उन्हें इस काम में पूरा सहयोग करती हैं। योगिता आज भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही हैं, लेकिन साथ ही अपने छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने का सपना भी देख रही हैं।

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