जगदलपुर

गुजरात के बाद छत्तीसगढ़ बना प्रवासी पक्षियों का ठिकाना! बस्तर में ग्रेटर व्हाइट-फ्रंटेड हंस मोह रहा मन

CG News: प्रवासी पक्षी ग्रेटर व्हाइट-फ्रंटेड हंस का पसंदीदा स्थान बना बस्तर बना हुआ है। बीते 14 सालों से यहां प​क्षियों को आना जारी है। जलाशयों में इनका झुंड देखा जा सकता है..

2 min read
आर्कटिक सागर और हिमालय को पार कर बस्तर पहुंचे ग्रेटर व्हाइट-फ्रंटेड हंस ( Photo - Patrika)

CG News: कई हजार किलोमीटर दूर आर्कटिक सागर और ऊंचे हिमालय को पार कर दुर्लभ प्रवासी पक्षी ग्रेटर व्हाइट-फ्रंटेड हंस (स्पेकलबेलीड गूज) एक बार फिर बस्तर के जलाशयों में पहुंच रहे हैं। विदेशी मेहमानों का सबसे पसंदीदा स्थान यहां के तारापुर, पीतापुर, दशपाल और राजनगर स्थित जलाशय प्रमुख हैं। इन स्थानों में प्रवासी पक्षियों का झुंड देखा जा सकता है।

पक्षी विज्ञान के लिए बड़ी उपलब्धि

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 14 वर्षों से लगातार इस प्रजाति का बस्तर आना छत्तीसगढ़ में पक्षी संरक्षण और पक्षी विज्ञान अनुसंधान के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत है। ग्रामीणों के अनुसार, ये प्रवासी हंस रोजाना दिखाई दे रहे हैं और स्थानीय लोग इन्हें शिकारियों से बचाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह जागरूकता इन पक्षियों के सुरक्षित प्रवास के लिए अहम मानी जा रही है।

CG News: आर्कटिक टुंड्रा से भारत तक का अद्भुत प्रवास

ग्रेटर व्हाइट-फ्रंटेड हंस आर्कटिक टुंड्रा में प्रजनन करता है, जिसका क्षेत्र ग्रीनलैंड से लेकर रूस (साइबेरिया), उत्तरी कनाडा और अलास्का तक फैला है। सर्दियों में यह प्रजाति यूरोप और एशिया के विभिन्न हिस्सों से दक्षिण की ओर पलायन करती है और भारत में गुजरात के साथ-साथ अब बस्तर को भी अपना प्रमुख ठिकाना बना रही है। इस पक्षी के पेट पर मौजूद काले-सफेद ‘‘नमक-मिर्च’’ जैसे धब्बों के कारण इसे आमतौर पर स्पेकलबेलीड हंस कहा जाता है। इससे पहले वर्ष 2020 में रायपुर के पास इस प्रजाति की उपस्थिति दर्ज की गई थी।

तारापुर ऐश डाइक बना प्रवासी पक्षियों का हॉट स्पॉट

प्रोफेसर प्राणी विज्ञान व पक्षी विशेषज्ञ, डॉ सुशील दत्ता ने बताया कि तारापुर ऐश डाइक अब छत्तीसगढ़ में प्रवासी पक्षियों के लिए एक उभरता हुआ हॉट स्पॉट बन चुका है। यहां का साफ पानी, पर्याप्त भोजन संसाधन, अनुकूल वेटलैंड संरचना और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप विभिन्न दुर्लभ प्रवासी प्रजातियों को आकर्षित कर रहा है। यदि इस क्षेत्र का संरक्षण सुनियोजित ढंग से किया जाए, तो आने वाले वर्षों में तारापुर जलाशय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पक्षी पर्यटन व शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

Published on:
04 Jan 2026 01:41 pm
Also Read
View All

अगली खबर