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मलेरिया को हल्के में न लें… बुखार के साथ दस्त भी हो सकता है खतरे का संकेत, डॉक्टरों ने दी सलाह

Malaria Symptoms Change: जगदलपुर जिले में आयोजित मलेरिया अपडेट-2026 संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी और कहा मलेरिया के लक्षण अब पहले जैसे नहीं रहे।

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मलेरिया को हल्के में न लें... बुखार के साथ दस्त भी हो सकता है खतरे का संकेत, डॉक्टरों ने दी सलाह(Photo-patrika)

Malaria Symptoms Change: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले में आयोजित मलेरिया अपडेट-2026 संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी और कहा मलेरिया के लक्षण अब पहले जैसे नहीं रहे। अब तक दर्द, उल्टी, कंपकंपी और तेज बुखार को मलेरिया के सामान्य लक्षण माना जाता था, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अब बुखार के साथ दस्त या पेट खराब होना भी मलेरिया का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

Malaria Symptoms Change: विशेषज्ञों ने दी नई जानकारी

डिमरापाल स्थित मेकॉज के ऑडिटोरियम में आयोजित मलेरिया अपडेट-2026 संगोष्ठी में देशभर से आए विशेषज्ञों ने मलेरिया के बदलते स्वरूप पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि अब असिम्प्टोमैटिक मलेरिया यानी बिना स्पष्ट लक्षण वाला मलेरिया सबसे ज्यादा खतरनाक हो गया है। इसमें मरीज को बीमारी का पता ही नहीं चलता और समय पर इलाज न मिलने से स्थिति गंभीर हो सकती है।

बदलते वातावरण का असर

विशेषज्ञों के अनुसार बदलते रहन-सहन और पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण मलेरिया के पैरासाइट भी अपना स्वरूप बदल रहे हैं। यही वजह है कि अब कमजोरी, हल्का सिरदर्द, दस्त या पेट खराब होने जैसे लक्षण दिखने पर भी मलेरिया की जांच कराना जरूरी माना जा रहा है।

गंभीर स्थिति के हो सकते हैं संकेत

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि मरीज को बेहोशी, दौरे, अत्यधिक कमजोरी, गंभीर एनीमिया, किडनी फेलियर या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो यह कॉम्प्लीकेटेड मलेरिया के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती कर आर्टीसुनेट इंजेक्शन सहित आपात उपचार देना पड़ता है।

बस्तर में नियंत्रण अभियान के बेहतर परिणाम

हालांकि राहत की बात यह है कि बस्तर जिले में मलेरिया नियंत्रण अभियान के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। वर्ष 2017 में करीब 8.85 लाख की आबादी में 13 हजार से अधिक मलेरिया मरीज मिले थे और 22 लोगों की मौत हुई थी। वहीं वर्ष 2025 तक मरीजों की संख्या घटकर करीब 2,887 रह गई है।

पिछले साल नहीं हुई एक भी मौत

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि पिछले वर्ष पूरे जिले में मलेरिया से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई। इसे मलेरिया नियंत्रण अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते लक्षणों को पहचानना और समय पर जांच कराना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।