
Tractor Protest: मंगलवार की दोपहर एक तस्वीर ने किसानों की परेशानियों आम जन तक लाकर खड़ा कर दिया। दरअसल रस्सी से खींचकर एसडीएम कार्यालय तक लाया गया ट्रैक्टर केवल एक वाहन नहीं था, बल्कि उस किसान की मजबूरी का प्रतीक था जो अन्न पैदा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। सवाल यह है कि जब खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में किसान को डीजल, खाद और बीज के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, तो उसकी परेशानी का समाधान कब और कैसे होगा?
गौरतलब है कि खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ खेतों में किसानों की भागदौड़ बढ़ गई है, लेकिन इस बार फसल की चिंता से पहले उन्हें डीजल, खाद और बीज की कमी से जूझना पड़ रहा है। मंगलवार को किसानों की इसी बेबसी की तस्वीर तब सामने आई, जब नारायणपाल क्षेत्र के किसानों ने खेत में बंद पड़े ट्रैक्टर को रस्सी से बांधकर करीब पांच किलोमीटर तक खींचते हुए एसडीएम कार्यालय बस्तर तक पहुंचाया। किसानों का कहना था कि जब खेत में ट्रैक्टर बंद हो जाए और पेट्रोल पंप से थोड़ी मात्रा में डीजल भी न मिले, तो आखिर वे खेती कैसे करें।
नारायणपाल क्षेत्र के एक किसान का ट्रैक्टर जुताई के दौरान खेत में ही डीजल खत्म होने से बंद हो गया। किसान डिब्बे में कुछ लीटर डीजल लेने पेट्रोल पंप पहुंचे, ताकि ट्रैक्टर दोबारा चालू कर खेत का काम पूरा कर सकें। आरोप है कि पंप संचालक ने डिब्बे में डीजल देने से मना कर दिया। इससे किसान की परेशानी और बढ़ गई।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि खेतों में फंसे कृषि यंत्रों के लिए सीमित मात्रा में डिब्बों में डीजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए और समितियों में पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध कराया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने समस्या को प्रशासन तक पहुंचाने का अनोखा तरीका अपनाया। किसानों ने बंद पड़े ट्रैक्टर को रस्सी से बांधा और उसे खींचते हुए लगभग पांच किलोमीटर दूर बस्तर एसडीएम कार्यालय तक ले गए। रास्ते भर यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। किसानों का कहना था कि यह सिर्फ एक ट्रैक्टर की कहानी नहीं, बल्कि पूरे इलाके के किसानों की परेशानी का प्रतीक है।