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Panchvati Plantation: बच्चों को किताबों से नहीं, पेड़ों से पढ़ाया जाएगा विज्ञान! बस्तर में शुरू हुई खास पहल

Bastar Oxyzone Park: बस्तर के कोलचूर हाई स्कूल में पहला ऑक्सीजोन पार्क विकसित किया जा रहा है। पंचवटी, नक्षत्र वाटिका और राशि वाटिका के तहत 208 विशेष पौधे लगाए जाएंगे।

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Panchvati Plantation

बस्तर के स्कूल में तैयार होगी पंचवटी (photo source- Patrika)

Panchvati Plantation: बस्तर अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और घने जंगलों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और शैक्षणिक नवाचार के नए मॉडल के लिए भी पहचान बना रहा है। जिले के कोलचूर स्थित हाई स्कूल में जल्द ही बस्तर का पहला ऑक्सीजोन पार्क विकसित किया जाएगा। करीब एक एकड़ क्षेत्र में बनने वाला यह पार्क केवल हरियाली बढ़ाने की पहल नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए प्रकृति, विज्ञान और भारतीय संस्कृति को एक साथ समझने वाली जीवंत पाठशाला साबित होगा।

विद्यालय परिसर में वर्तमान में लगभग 300 गड्ढों की तैयारी पूरी कर ली गई है। पहले चरण में यहां 208 विशेष पौधे लगाए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति गहरी समझ और जिम्मेदारी विकसित करना है।

Panchvati Plantation: पंचवटी के तहत लगाए जाएंगे पांच पवित्र वृक्ष

ऑक्सीजोन पार्क की सबसे खास विशेषता यहां विकसित की जा रही पंचवटी होगी। भारतीय सनातन परंपरा और पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखते हुए पंचवटी के अंतर्गत बरगद, पीपल, नीम, बेल और डूमर जैसे पांच पवित्र एवं उपयोगी वृक्षों को समूह में लगाया जाएगा।

इन पौधों का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ वैज्ञानिक और औषधीय दृष्टि से भी विशेष स्थान है। बरगद और पीपल जहां वातावरण में ऑक्सीजन संतुलन और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं, वहीं नीम अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। बेल और डूमर भी पारंपरिक चिकित्सा और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि पंचवटी बच्चों को केवल भारतीय संस्कृति से जोड़ने का माध्यम नहीं बनेगी, बल्कि उन्हें प्रकृति के महत्व को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर भी देगी।

नक्षत्र और राशि वाटिका बनेगी आकर्षण का केंद्र

ऑक्सीजोन पार्क में पंचवटी के साथ-साथ नक्षत्र वाटिका और राशि वाटिका भी विकसित की जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर विभिन्न राशियों और नक्षत्रों के अनुरूप पौधों का चयन कर उन्हें विशेष तरीके से लगाया जाएगा। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय ज्योतिष, प्रकृति और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली से जोड़ने का अनूठा प्रयास मानी जा रही है। स्कूल परिसर में यह वाटिका न केवल आकर्षण का केंद्र बनेगी, बल्कि छात्रों के लिए अध्ययन और शोध का विषय भी होगी।

हर पौधा बताएगा अपनी वैज्ञानिक कहानी

इस ऑक्सीजोन पार्क की एक और बड़ी विशेषता यह होगी कि यहां लगाए जाने वाले प्रत्येक पौधे के सामने आकर्षक और टिकाऊ डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। इन बोर्डों में पौधों की वानस्पतिक जानकारी, औषधीय गुण, पर्यावरणीय महत्व और दैनिक जीवन में उनकी उपयोगिता विस्तार से बताई जाएगी। इससे विद्यार्थी केवल पौधों की हरियाली और छांव तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनके वैज्ञानिक महत्व को भी समझ पाएंगे। भविष्य में स्कूल के छात्र इन पौधों पर आधारित प्रोजेक्ट और अध्ययन कार्य भी कर सकेंगे।

पर्यावरण शिक्षा का नया मॉडल बनेगा स्कूल

विद्यालय परिसर में हर साल पारंपरिक पौधरोपण किया जाता रहा है, लेकिन इस बार की योजना को पूरी तरह शैक्षणिक और दीर्घकालिक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पेड़ों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति व्यवहारिक समझ और नैतिक जिम्मेदारी विकसित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो आने वाले समय में यह प्रदेश के अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

Panchvati Plantation: प्रकृति और संस्कृति से जुड़ेगा नया भविष्य

आज जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है, ऐसे समय में बस्तर के एक स्कूल की यह पहल नई उम्मीद जगाती है। यह परियोजना बच्चों को किताबों के साथ प्रकृति से भी सीखने का अवसर देगी। कोलचूर का यह ऑक्सीजोन पार्क आने वाले समय में केवल हरियाली का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि यह पर्यावरण जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम बनकर उभरेगा।