जगदलपुर

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे की नींव हो चुकी तैयार, अब इस देवी की अनुमति से मनाया जाएगा बस्तर दशहरा

Bastar Dussehra 2019- काष्ठ से बने फूल रथ के पहिए को जोड़ते हैं टेकामेटा के लोहार (Blacksmith)  
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Updated: 25 Sep 2019, 4:45 PM IST
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे की नींव हो चुकी तैयार, अब इस देवी की अनुमति से मनाया जाएगा बस्तर दशहरा
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे की नींव हो चुकी तैयार, अब इस देवी की अनुमति से मनाया जाएगा बस्तर दशहरा

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा दुनिया में सबसे लंबे अवधि तक मनाया जाने वाला पर्व है। पर्व की शुरुआत हरेली अमावस्या को माचकोट जंगल से लाई गई लकड़ी ठुरलू खोटला पर पाटजात्रा रस्म के साथ होती है। इसके बाद बिरिंगपाल गांव के ग्रामीण सीरासार भवन में सरई पेड़ की टहनी को स्थापित कर डेरीगड़ाई रस्म पूरी करने के साथ विशाल रथ निर्माण के लिए जंगलों से लकड़ी शहर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है।

लोहे के चादर से जोड़ी जाती हैं
झारउमरगांव व बेड़ाउमरगांव के डेढ़- दो सौ ग्रामीण रथ निर्माण की जिम्मेदारी निभाते दस दिनों में पारंपरिक औजारों से विशाल रथ तैयार करते हैं। इसमें लगने वाले कील और लोहे की पट्टियां भी पारंपरिक रुप से स्थानीय लोहार सीरासार भवन में तैयार करता है। ये लोहार टेकामेटा गांव के होते हैं । इन लोहारो को लोहे की सिल्ली दी जाती हैं। वे अपनी जरूरत के हिसाब से आवश्यक उपकरण तैयार करते हैं। काष्ठ के बने पहिए जो टुकड़ों में होता हैं, इन्हें लोहे के चादर से जोड़ी जाती हैं। और पहिए के केन्द्र जहां एक्सिल फीट होता हैं वहा भी लोहे का आवरण लगा दिया जाता हैं ,जिससे रथ सुगमता से चल सके। अपने काम में दक्ष ये लोहार सिर्फ दो दिनो में पूरा करते हैं। इस वर्ष चार चक्के के फूल रथ का निर्माण हो रहा है।

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25 Sep 2019, 4:45 PM IST
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